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हिमाचल में एसटीएफ के ही चार कर्मचारियों को नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में गिरफ्तार किया है. आरोपित शिमला पहुंचने से पहले कुल्लू में एलएसडी की खेप लेकर पहुंचे थे,
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एसटीएफ के ही चार कर्मी गिरफ्तार हुए हैं. शिमला में पकड़े गए करीब एक करोड़ रुपये के एलएसडी तस्करी मामले ने नशे को खत्म करने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स के कर्मियों की कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में आ गई है. इस मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जिनकी भूमिका जांच के दायरे में है.
निलंबित किए गए कर्मियों में राजेश कुमार पुत्र रामदास गांव 14 मील डा. बडाग्राम त. मनाली जिला कुल्लु 40 साल, समीर, पुत्र अशोक कुमार R/o वार्ड न. 7 पारला भुन्तर त. भुन्तर जिला कुल्लु 40 साल, नितेश पुत्र रमेश चंद गांव बजौरा डा व त. भुन्तर जिला कुल्लु 46 साल और अशोक कुमार पुत्र ज्ञान चंद गांव वाशिंग त. व जिला कुल्लु 42 साल शामिल हैं.
पुलिस अधीक्षक शिमला गौरव सिंह ने बताया की आरोपित शिमला पहुंचने से पहले कुल्लू में एलएसडी की खेप लेकर पहुंचे थे, जहां इसे खपाने की योजना थी. हालांकि वहां कार्रवाई नहीं हुई, जिससे तैनात पुलिस कर्मियों की भूमिका पर संदेह गहरा गया है. इसके बाद आरोपित शिमला पहुंचे और बीसीएस क्षेत्र में ठहरे. 10 मार्च को शिमला पुलिस की स्पेशल सेल ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश देकर संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया. उनके पास से 562 स्ट्रिप (11.570 ग्राम) एलएसडी बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है.
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से केरल निवासी नविल हेरिसन को गिरफ्तार किया, जिसे इस नेटवर्क का मुख्य सप्लायर बताया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक एलएसडी को किताबों के भीतर छिपाकर शिमला लाया गया था. प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के गोवा, दिल्ली सहित कई राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं. एलएसडी की एक स्ट्रिप की कीमत 10 हजार रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.
एलएसडी (Lysergic acid diethylamide) एक शक्तिशाली सिंथेटिक हैलुसिनोजेनिक ड्रग है. जिसको आमतौर पर कागज (ब्लाटर पेपर) के छोटे टुकड़ों में बेची जाती है. इसके सेवन करने पर मस्तिष्क में सेरोटोनिन रिसेप्टर्स को प्रभावित करती है.










