हिमाचल प्रदेश राज्य कर एवं आबकारी विभाग के दक्षिण क्षेत्र परमाणु जीएसटी विंग की टीम में कालाअंब में छापामारी कर 12 करोड़ के कर चोरी का खुलासा किया है। दक्षिण क्षेत्र परवाणू जीएसटी विंग की टीम ने जॉइंट कमिश्नर जीडी ठाकुर के नेतृत्व में शुक्रवार को जिला सिरमौर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब के लैंड उद्योगों पर छापेमारी की। कालाअंब में लीड (सीसा) बनाने वाली 17 इकाइयां हैं, जिनमें से 12 मासिक रिटर्न के माध्यम से स्वैच्छिक रूप से एजीटी जमा करने के लिए पंजीकृत हैं, जबकि अन्य बैरियर पर एजीटी का भुगतान कर रहे हैं या एजीटी अधिनियम के तहत पंजीकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं। विभाग ने उन्हें अनिवार्य पंजीकरण कराने और नियमित मासिक रिटर्न के माध्यम से एजीटी का भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जीएसटी विंग की टीम को बिजनेस इंटेलिजेंस टूल्स से केस स्टडी में यह पता चला है कि पंजीकृत 12 लीड निर्माता अपने ई-वे बिल घोषणाओं के अनुसार एजीटी का भुगतान नहीं कर रहे हैं, और न ही विभाग के साथ नियमित रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। इसलिए विभाग ने पिछले दो महीनों से इन डीलरों से एजीटी देयता का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद सभी रिटर्न डेटा और ऑनलाइन डेटा की जांच करने और इन डीलरों के साथ प्रारंभिक पूछताछ करने के बाद लगभग 12 करोड़ की कर चोरी का खुलासा किया है। इस कर राशि पर ब्याज और जुर्माना, जो 200 प्रतिशत तक हो सकता है, इसके अतिरिक्त होगा।
चूंकि जीएसटी के तहत इन करदाताओं के खिलाफ पहले से ही विस्तृत जांच चल रही है, इसलिए एजीटी देनदारियों के निर्धारण का जीएसटी कर योग्य टर्नओवर के निर्धारण पर एक अतिरिक्त प्रभाव पड़ेगा। वही राज्य विभाग के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार वर्ष 2023-24 से 2024-25 तक सीसे की एकल वस्तु पर कुल 12 करोड़ रुपए का एजीटी देय है। विदित रहे कि राज्य सरकार ने अप्रैल 2023 से लीड की वस्तु पर 0.50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से एजीटी कर लगाया है। सीसा निर्माताओं ने राज्य सरकार से इसे घटाकर 50 प्रतिशत करने का अनुरोध किया था, जिसे अक्टूबर 2023 में घटाकर 25 पैसे प्रति किलोग्राम कर दिया गया, जिससे लैंड (सीसा) उद्योगों को बड़ी राहत मिली।
उधर दक्षिण क्षेत्र परमाणु जीएसटी विंग के जॉइंट कमिश्नर जीडी ठाकुर ने लीड उद्योगों से 12 करोड़ की कर चोरी की पुष्टि करते हुए बताया कि यह धन राशि राज्य सरकार को नेट कैश रुपए के रूप में मिलेगा। वही शिमला, सिरमौर, सोलन और किन्नौर के सभी 22 दक्षिणी जोन के सहायक आयुक्तों को एजीटी और सीजीसीटी अधिनियम के तहत करदाताओं के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है। ताकि इन अधिनियमों के तहत पंजीकृत सभी डीलरों को पंजीकृत किया जा सके, उनकी नियमित रिटर्न फाइलिंग सुनिश्चित की जा सके और ऐसे सभी डीलरों की जांच की जा सके। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका कर भुगतान केवल नकद भुगतान के रूप में हो और किसी भी कानून के तहत कोई सेट ऑफ न हो। इसके कारण इन अधिनियमों के तहत राज्य के राजस्व संग्रह में कई गुना वृद्धि होगी।