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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव मामले में आज हिमाचल हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. माननीय अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार को पंचायतीराज चुनाव 30 अप्रैल से पहले पूरे करवाने के आदेश जारी किए हैं. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोमेश शर्मा की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया है.
हिमाचल सरकार ने प्रदेश में डिजास्टर एक्ट का हवाला देते हुए चुनाव टाले थे. हाकोर्ट के फैसले के बाद सीएम सुक्खू आज फिर मीडिया के सामने डिजास्टर एक्ट का हवाला देते नजर आए. हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर कोर्ट के फैसले पर सीएम ने किसी भी तरह की नाराजगी नहीं जताई, लेकिन डिजास्टर एक्ट लगा होने के बाद कोर्ट के फैसले पर सवाल जरूर खड़ा किया है.
सीएम सुक्खू ने कहा कि ‘हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर फैसला दिया है किस कानून के तहत दिया है. हिमाचल में डिजास्टर एक्ट लगा है, अब इसका मतलब है कि इसके कोई मायने ही नहीं रह गए हैं? अच्छा होता कि इस बारे में सरकार को भी पूछा जाता. हम भी यही चाहते हैं कि अप्रैल-मई में चुनाव हो जाते. हाईकोर्ट के फैसलों की कानूनी व्याख्या नहीं हो पा रही है. मेरा ये मानना है कि डिजास्टर एक्ट लागू होने के बाद कोई भी चीज घटित होती है तो सब चीजों की संभावनाओं को देखकर आगे बढ़ना पड़ता है.’
अब क्या करेगी सरकार
सीएम ने कहा कि हम फैसले का अध्ययन करेंगे, किस तरह का फैसला आया है. इसके बाद कानूनी कार्रवाई करेंगे. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के सवाल पर सीएम ने कहा कि ‘बात सुप्रीम कोर्ट की नहीं है, लेकिन सवाल ये है कि भारतीय संसद के बनाए डिजास्टर एक्ट के मायने हैं कि नहीं? 30 अप्रैल तक चुनाव करवाने के लिए हाईकोर्ट ने कहा हम सभी चीजों का अध्ययन करेंगे. हम हाईकोर्ट से डिजास्टर एक्ट की व्याख्या पूछेंगे.’
बता दें कि अपने फैसले में हाईकोर्ट ने 28 फरवरी तक चुनाव संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा है. इसके अलावा 30 अप्रैल तक पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने के भी आदेश जारी किए गए हैं. याचिकाकर्ता डिक्कन कुमार ठाकुर और उनकी तरफ से पेश एडवोकेट नंदलाल ठाकुर ने इस फैसले को बड़ी राहत बताया है. याचिकाकर्ता ने कहा था कि सरकार डिजास्टर एक्ट हवाला देकर पंचायती राज चुनाव को नहीं टाल सकती है.
क्या है मामला
गौरतलब है कि इस माह पंचायत कार्यकाल पूरा हो जाएगा. जिसके चलते पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव होने थे, लेकिन इस दिशा में सरकार की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई. हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी पंचायत चुनाव का मुद्दा उठाया गया था. जहां भाजपा ने सरकार ने पंचायत चुनाव करवाने की मांग की थी. जबकि प्रदेश सरकार का कहना था कि हिमाचल में बरसात में आई आपदा में बहुत सी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थी. अभी भी बहुत से ग्रामीण इलाकों के साथ संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है, ऐसे में पंचायत चुनाव करवाना संभव नहीं है. मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अब कोर्ट ने पंचायत चुनाव करवाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.











