अंतर्राष्ट्रीय ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग नैटवर्क में हिमाचल का कनैक्शन उजागर

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अंतर्राष्ट्रीय ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को हिमाचल प्रदेश से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। गोवा से शुरू हुई इस जांच में सामने आया है कि नशीले पदार्थों की संगठित आपूर्ति शृंखला हिमाचल तक फैली हुई है, जिससे राज्य का नाम इस हाई-प्रोफाइल मामले में जुड़ गया है। ईडी के पणजी जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत देश के विभिन्न राज्यों में एक साथ कार्रवाई करते हुए 26 परिसरों पर तलाशी ली। इस अभियान के तहत प्रदेश के 2 जिलों में भी दबिश दिए जाने की सूचना है। यह कार्रवाई गोवा पुलिस की मादक पदार्थ निरोधक इकाई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई थी, जिसमें वाणिज्यिक मात्रा में ड्रग तस्करी के आरोप दर्ज हैं। जांच के दौरान ईडी को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि गोवा से संचालित एक सुव्यवस्थित गिरोह कई राज्यों में नशीले पदार्थों की बी.2बी. (बिजनैस-टू-बिजनैस) आधार पर सप्लाई कर रहा था। इस नैटवर्क की कड़ियां हिमाचल के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा और केरल तक जुड़ी हुई पाई गई हैं।

तलाशी के दौरान ईडी ने लगभग 3 करोड़ रुपए नकद, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए। तलाशी के समय मादक पदार्थ भी बरामद हुए, जिनकी जब्ती के लिए स्थानीय पुलिस और संबंधित एजैंसियों के साथ समन्वय किया गया।

कुरियर-डाक माध्यमों का योजनाबद्ध उपयोग

ईडी ने डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया है कि एमडीएमए, एक्स्टेसी, चरस, कुश, शरूम और कोकीन जैसे प्रतिबंधित मादक पदार्थों की बड़े पैमाने पर आपूर्ति की जा रही थी। इन पदार्थों की ढुलाई के लिए कुरियर और डाक माध्यमों का योजनाबद्ध उपयोग किया जा रहा था।

जांच में खुलासे

जांच में यह भी उजागर हुआ है कि ड्रग तस्करी से अर्जित धन को यूपीआई, बैंक अंतरण, डिजिटल करैंसी और नकद लेनदेन के जरिए इधर-उधर किया गया। धन को छिपाने के लिए जटिल लेन-देन प्रणाली और परतदार वित्तीय ढांचे का सहारा लिया गया।

जांच जारी

ईडी के अनुसार इस अंतर्राष्ट्रीय ड्रग–मनी लॉन्ड्रिंग नैटवर्क से जुड़े सभी लाभार्थियों और सहयोगियों की पहचान के लिए जांच लगातार जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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