हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी निकायों के संचालन को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से एक अहम प्रशासनिक निर्णय लिया है। शहरी विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेश के 30 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए गए हैं।
सरकारी आदेश के तहत संबंधित नगर निकायों में तैनात कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer) अब अपने-अपने क्षेत्र में प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। यह निर्णय हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1994 की धारा 268 (1) के अंतर्गत लिया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक नियुक्ति का उद्देश्य किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता को रोकना तथा शहरी निकायों में विकास कार्यों को बिना बाधा आगे बढ़ाना है। सरकार ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए यह व्यवस्था की है ताकि आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
इसके साथ ही सरकार ने संबंधित शहरी निकायों के एसडीओ (सिविल) को भी विशेष प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए हैं। एसडीओ अब अपने क्षेत्राधिकार में ₹1 लाख से ₹5 लाख तक के विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर सकेंगे, जिससे छोटी और आवश्यक परियोजनाओं के लिए लंबी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।
प्रशासक नियुक्त किए गए शहरी निकायों में बिलासपुर, श्री नैना देवी जी, घुमारवीं, तलई, चंबा, डलहौजी, चुवाड़ी, सुजानपुर-टिहरा, नादौन, भोटा, कांगड़ा, नूरपुर, नगरोटा बगवां, देहरा, ज्वालामुखी, बैजनाथ-पपरोला, जवाली, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, भुंतर, बंजार, सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंदरनगर, नेरचौक, रिवालसर, करसोग, रोहड़ू और रामपुर शामिल हैं।
सरकार के इस फैसले को शहरी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि प्रशासक व्यवस्था लागू होने से नगर निकायों में दैनिक प्रशासनिक निर्णयों, विकास योजनाओं और नागरिक सेवाओं को गति मिलेगी।












