Khabron wala
नशे की एक छोटी सी पुड़िया जब पुलिस के हाथ लगी, तो उसने पूरे सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। सोलन पुलिस ने कंडाघाट में पकड़े गए दो नशेडि़यों के जरिए मोहाली में बैठे उस ‘किंगपिन’ तक पहुँचने में सफलता पाई है, जो पहाड़ों में मौत का सामान सप्लाई कर रहा था।
कंडाघाट से शुरू हुई कहानी
मामले की शुरुआत 6 जनवरी को हुई जब कंडाघाट क्षेत्र के अश्वनी खड्ड मार्ग पर पुलिस ने घेराबंदी की थी। यहाँ से पुलिस के हत्थे दो युवक चढ़े—सुरेश कुमार (कंडाघाट) और पारस (मंडी)। इनके पास से 14.71 ग्राम चिट्टा, शराब की आधा दर्जन बोतलें और करीब 19,000 रुपये की नगदी बरामद हुई थी। पुलिस को संदेह था कि ये सिर्फ मोहरे हैं, असली खिलाड़ी कहीं और बैठा है।
पूछताछ ने उगले राज
अदालती रिमांड के दौरान पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की, तो आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने यह नशा 33,000 रुपये में मोहाली से खरीदा था। सोलन पुलिस ने देरी न करते हुए ‘बैकवर्ड लिंकेज’ (पुराने संपर्कों) की कड़ियाँ जोड़ीं और सीधे पंजाब में दबिश दी।
मोहाली से ‘मास्टरमाइंड’ गिरफ्तार
पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर मोहाली के एसएएस नगर से मुख्य सप्लायर संदीप कुमार को दबोच लिया। संदीप मूल रूप से मुक्तसर (पंजाब) का रहने वाला है। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से भी 8.51 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है।
तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली मोटरसाइकिल को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। एसपी सोलन ने पुष्टि की है कि आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है ताकि इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचा जा सके।










