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हिमाचल प्रदेश के ‘अर्थशास्त्र’ की रीढ़ कहे जाने वाले सेब बागवान इन दिनों आढ़तियों और बाहरी खरीदारों (लदानियों) की धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में 379 बागवानों के साथ करोड़ों रुपए की ठगी हुई है। शातिर खरीदार बागवानों की करीब 8.05 करोड़ रुपए की मेहनत की कमाई डकार कर रफूचक्कर हो गए हैं।
सोलन में ठगी का ‘हॉटस्पॉट’, शिमला भी पीछे नहीं
कृषि मंत्री ने ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर के सवाल के जवाब में बताया कि धोखाधड़ी के सबसे अधिक मामले सोलन और शिमला जिलों से सामने आए हैं। सोलन जिले में यहां APMC को सबसे ज्यादा 191 शिकायतें मिलीं, जिनमें 3.37 करोड़ रुपए का भुगतान फंसा हुआ है। राहत की बात यह है कि प्रशासन ने 12 मामलों को सुलझाकर 98.34 लाख रुपए बागवानों को वापस दिलाए हैं। वहीं, शिमला जिला यहां 144 शिकायतों के जरिए 4.24 करोड़ रुपए हड़पने के आरोप लगे हैं। विभाग अब तक केवल 78.79 लाख रुपए की रिकवरी ही कर पाया है। कुल्लू-लाहौल स्पीति में 44 मामलों में 45.38 लाख की ठगी हुई, जिसमें से 15.09 लाख रुपए बागवानों को वापस मिल चुके हैं।
डिफॉल्टरों पर कानूनी शिकंजा
सरकार ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी करने वाले व्यापारियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब तक 16 बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ अदालतों में चालान पेश किए जा चुके हैं। कृषि मंत्री ने दावा किया कि बकाया भुगतान दिलाने के लिए APMC निरंतर प्रयास कर रही है। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने APMC की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “बिना उचित जांच-पड़ताल और पुख्ता गारंटी के बाहरी व्यापारियों को प्रदेश की मंडियों में कारोबार की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। ये तो केवल वो मामले हैं जो रिकॉर्ड में हैं, असल में ठगी का शिकार हुए बागवानों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।”











