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पांवटा साहिब : खबर का असर , खबरोंवाला ने सबसे पहले किया था स्टाफ सहित  जैसलमेर घूमने का  खुलासा , माजरा के नायब तहसीलदार इंद्र कुमार को डीसी ने किया तलब

 

खबरों वाला द्वारा सबसे पहले खबर प्रकाशित की गई थी कि माजरा उप तहसील के नए तहसीलदार इंद्र कुमार स्टाफ के सहित छुट्टियां मना रहे हैं जबकि रिकॉर्ड में वह मेडिकल लीव पर थे खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया था और सभी की लोकेशन मांगी गई थी और नोटिस जारी किया गया था यह कार्रवाई एसडीएम पावटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा द्वारा की गई थी इस विषय को लेकर खबरोंवाला के संपादक जसवीर सिंह हंस को अनेक मीडिया हाउस और स्थानीय लोगों सहित आला प्रशासन के लोगों के फोन आ रहे हैं

अब इस मामले में राज्य स्तर पर सभी मीडिया द्वारा मुद्दा उठाया गया उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने नायब तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है, जबकि पांवटा साहिब के एसडीएम गुंजीत चीमा द्वारा जारी कारण बताओ नोटिसों के जवाब के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। सूत्रों का कहना है कि संलिप्त कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की पूरी संभावना है।

जानकारी के अनुसार 12 और 13 फरवरी को नायब तहसीलदार सहित तीन पटवारी, एक कानूनगो और दो महिलाओं समेत तीन क्लर्क राजस्थान गए थे। संबंधित कर्मियों ने कथित तौर पर रिश्तेदार की शादी और बीमारी का हवाला देकर कैजुअल लीव ली, जबकि माजरा के तहसीलदार इंद्र कुमार मेडिकल लीव पर थे। मामला तब खुला जब यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं। खबरों वाला ने इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट प्रशासन तक पहुंचाए, जिसके बाद पांवटा साहिब प्रशासन हरकत में आया। संबंधित कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि जीपीए करने वाले कुछ दलालों द्वारा यह यात्रा प्रायोजित की गई थी , माजरा उप तहसील और पांवटा साहिब तहसील पहले भी दूसरे राज्यों के जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) से जुड़े मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं। जानकार इसे अपनी तरह का अनोखा मामला बता रहे हैं, क्योंकि एक साथ राजस्व अमले के कई अधिकारियों-कर्मचारियों का अवकाश लेकर बाहर जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वही सारे स्टाफ को छुट्टी देने वाले पांवटा साहिब के नायब तहसीलदार रविंद्र सिसोदिया को प्रशासन बचाने में जुटा हुआ है

यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो निलंबन से लेकर विभागीय जांच तक की कार्रवाई संभव है। फिलहाल, राजस्व विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर उठे सवालों ने इस मामले को जिले की सबसे चर्चित प्रशासनिक घटना बना दिया है।

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