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पेड़ कटान मामला : सस्पेंड हुए वन कर्मियों के समर्थन में उतरा संघ, बोला- बिना जांच सुना दिया फैसला, वापस हो आदेश

Khabron wala

शिलाई क्षेत्र में 307 पेड़ों के अवैध कटान के मामले में वन रक्षक और वन खंड अधिकारी के निलंबन को लेकर अब वन विभाग के कर्मचारियों का संगठन खुलकर सामने आ गया है। वन कर्मचारी संघ, वन वृत्त नाहन ने वन मंडल अधिकारी रेणुकाजी को ज्ञापन सौंपकर 9 मार्च 2026 को जारी निलंबन आदेश पर पुनर्विचार करने और इसे तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि बिना किसी प्रारंभिक जांच और बिना संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए निलंबन आदेश जारी किया गया, जो प्रशासनिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

वन कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अनुज कुमार, मीडिया प्रभारी नायब सिंह, स्टेट वरिष्ठ महासचिव तेजवीर सिंह और स्टेट वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलदेव कटोच ने कहा कि फेलिंग परमिशन 25 फरवरी 2026 को रेंज कार्यालय शिलाई को प्राप्त हुई, जबकि उसकी वैधता 22 फरवरी 2026 को ही समाप्त हो चुकी थी। यह अनुमति न तो दूरभाष, न डाक और न ही व्हाट्सएप के माध्यम से संबंधित कर्मचारियों को सूचनार्थ भेजी गई थी। ऐसे में कर्मचारियों को इसकी जानकारी ही नहीं थी।

संघ के अनुसार 5 मार्च 2026 को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा सुबह करीब 11 बजे मजदूरों को लाकर लगभग तीन घंटे के भीतर 307 पेड़ गिरा दिए गए। उस समय वन रक्षक टीका राम राजकीय कार्य से वन मंडल कार्यालय श्री रेणुकाजी में मौजूद थे, जबकि वन खंड अधिकारी कंवर राणा टीडी मार्किंग कार्य के बाद आधे दिन के स्वीकृत अवकाश पर थे। घटना की सूचना मिलने पर वन रक्षक मंडल कार्यालय से और वन खंड अधिकारी शाम करीब 7 बजे मौके पर पहुंचे और नियमानुसार विभागीय कार्रवाई शुरू की।

संघ का कहना है कि इसके बाद विभागीय नियमों के तहत लकड़ी का सीजर, डैमेज रिपोर्ट और फर्स्ट इन्फॉर्मेशन की कार्रवाई 6 मार्च 2026 को की गई, जो पूरी तरह नियमों के अनुरूप है। साथ ही यह भी बताया गया कि संबंधित वन रक्षक एक बीट के अलावा शिलाई और मिल्ला दो वन खंडों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, जिनका क्षेत्रफल काफी बड़ा और संवेदनशील है। इतने विस्तृत क्षेत्र की निगरानी एक ही कर्मचारी के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन है, खासकर तब जब कई वर्षों से इन खंडों में ब्लॉक अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है।

वन कर्मचारी संघ ने यह भी कहा कि सेवा नियमों के तहत बिना स्पष्ट आरोप और प्रारंभिक जांच के निलंबन आदेश जारी करना उचित नहीं है। संघ ने अपने ज्ञापन में केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 10 का उल्लेख करते हुए कहा कि निलंबन सामान्यतः तभी किया जाता है, जब अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो या गंभीर आरोपों की जांच आवश्यक हो।

संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि Ajay Kumar Choudhary बनाम Union of India और O. P. Gupta बनाम Union of India मामलों में भी अदालत ने स्पष्ट किया है कि निलंबन मनमाना या दंडात्मक कदम नहीं होना चाहिए। संघ का आरोप है कि यह निर्णय जल्दबाजी में और सोशल मीडिया में फैली भ्रामक जानकारी से प्रभावित होकर लिया गया प्रतीत होता है।

वन कर्मचारी संघ ने मांग की है कि 9 मार्च 2026 को जारी निलंबन आदेश की पुनः समीक्षा कर इसे तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और निष्पक्ष जांच के बाद ही उचित निर्णय लिया जाए, ताकि विभागीय कर्मचारियों का मनोबल और न्याय की भावना बनी रहे।

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