Khabron wala
उत्तराखंड के देहरादून में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सेना के हवलदार विशंभर सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के उनके पैतृक गांव मलंगड़ मियां में सैन्य सम्मान के साथ हुआ. श्मशान घाट पर परिवार और गांव के लोगों की मौजूदगी में सिंह के 11 साल के बेटे अक्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी.
सेना के अधिकारियों ने बताया कि ऊना जिले के निवासी हवलदार विशंभर सिंह सोमवार को शारीरिक प्रशिक्षण सत्र के बाद साइकिल से देहरादून स्थित अपनी यूनिट में लौट रहे थे, तभी उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई. साथी सैनिक उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. सिंह जुलाई 2008 में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल हुए थे.
मंगलवार सुबह जैसे ही हवलदार सिंह का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, वहां माहौल बहुत दुखी हो गया. उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए. इस दौरान बंगाणा की एसडीएम सोनू गोयल, पुलिस उपाधीक्षक अजय ठाकुर, देहरादून से आए सैन्य अधिकारी और पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर समेत कई लोग सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे. हवलदार सिंह के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटे हैं. पांच साल पहले उनके छोटे भाई जसविंदर सिंह का भी निधन हो गया था, वे भी सेना में थे. उनके पिता रसीला राम भी सेना के रिटायर्ड सूबेदार हैं
मंगलवार सुबह जैसे ही हवलदार सिंह का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, वहां माहौल बहुत दुखी हो गया. उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों लोग जमा हुए. इस दौरान बंगाणा की एसडीएम सोनू गोयल, पुलिस उपाधीक्षक अजय ठाकुर, देहरादून से आए सैन्य अधिकारी और पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर समेत कई लोग सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे. हवलदार सिंह के परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटे हैं. पांच साल पहले उनके छोटे भाई जसविंदर सिंह का भी निधन हो गया था, वे भी सेना में थे. उनके पिता रसीला राम भी सेना के रिटायर्ड सूबेदार हैं.
पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिला ऊना के कुटलैहड़ निवासी सेना के जवान श्री विशम्बर सिंह जी के निधन होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मेरी संवेदनाएं वीर सैनिक के परिजनों के साथ हैं. ईश्वर वीर जवान की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकसंतप्त परिजनों को इस असह्य दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे.
डीएसपी अजय ठाकुर ने लिखा कि ऊना के शहीद विशम्भर सिंह भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में हवलदार थे और वर्ष 2008 में सेना में भर्ती हुए थे, उन्हें पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जहां उनके 11 वर्षीय बेटे अक्षित ने मुखाग्नि दी. उनके पीछे पत्नी, माता-पिता और दो बेटे (11 वर्ष व 6 माह) हैं. पिता रसीला राम भारतीय सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं. परिवार पहले भी एक बेटे को खो चुका है और अब विशम्भर सिंह की शहादत ने उन्हें दूसरा बड़ा सदमा दिया है. देश के प्रति उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव याद रखा जाएगा और उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. भारत माता के इस वीर सपूत को शत-शत नमन.









