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साइबर ठग अब लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए सिर्फ ओटीपी या लिंक का सहारा नहीं ले रहे हैं, बल्कि खौफ और डिजिटल अरेस्ट को अपना नया हथियार बना चुके हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक रिटायर्ड अधिकारी साइबर अपराधियों के खौफनाक मनोवैज्ञानिक जाल में इस कदर फंसे कि उन्होंने खुद अपनी जिंदगी भर की कमाई (1 करोड़ 14 लाख रुपए) ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। शातिरों ने अधिकारी को फर्जी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर पूरे दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
ऐसे बुना गया डिजिटल अरेस्ट का जाल
ठगी का यह तरीका बेहद सुनियोजित था। शिकायतकर्ता के मुताबिक साइबर शातिरों ने उन्हें वीडियो कॉल की और खुद को कभी प्रवर्तन निदेशालय, कभी क्राइम ब्रांच तो कभी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का आला अधिकारी बताया। वीडियो कॉल पर ही ठगों ने रिटायर्ड अफसर को धमकाया कि उनका नाम एक बेहद गंभीर आर्थिक अपराध की जांच में सामने आया है। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का खेल शुरू हो गया। शातिरों ने अफसर को डराकर पाबंद कर दिया कि वे किसी से संपर्क नहीं करेंगे और जांच पूरी होने तक लगातार उनकी डिजिटल निगरानी में रहेंगे।
वैरिफिकेशन के नाम पर किस्तों में लुटवाए पैसे
पढ़े-लिखे और अनुभवी होने के बावजूद रिटायर्ड अधिकारी इस कदर खौफजदा हो गए कि उनका सोचने-समझने का दायरा खत्म हो गया। ठगों ने उन्हें झांसा दिया कि उनके बैंक खातों की धनराशि को वैरिफिकेशन और सिक्योरिटी के लिए सरकारी निगरानी वाले खातों में जमा कराना होगा। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच में निर्दोष साबित होने पर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी डर और भरोसे के बीच अधिकारी ने 3 नवम्बर, 2025 से 2 जनवरी, 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में 1 करोड़ 14 लाख रुपए जालसाजों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। पूरे दो महीने तक अधिकारी को यह भनक तक नहीं लगी कि वे देश की किसी एजैंसी की नहीं, बल्कि साइबर क्रिमिनल्स की कैद में हैं।
जब तक खुला राज, तब तक हो चुकी थी बहुत देर
तय समय बीत जाने के बाद जब न तो कोई रकम वापस आई और न ही उन कथित अधिकारियों से दोबारा कोई संपर्क हो पाया, तब जाकर रिटायर्ड अधिकारी की नींद टूटी। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित सीधे मंडी के साइबर क्राइम पुलिस थाने पहुंचे और अपने साथ हुए इस खौफनाक डिजिटल टॉर्चर और ठगी की पूरी आपबीती सुनाई। मंडी पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर ठगों के नैटवर्क को खंगालने के लिए आगामी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस की सख्त एडवाइजरी: डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं
इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस ने आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों और रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और न ही कोई केंद्रीय जांच एजैंसी वीडियो कॉल पर धमकाकर पैसे ट्रांसफर करवाती है। लोगों से अपील की गई है कि ऐसे वीडियो कॉल या धमकियों से कतई न घबराएं और अनजान खातों में एक भी रुपया न भेजें। जागरूकता अभियानों के बावजूद ऐसे मामलों में हो रही बढ़ोतरी चिंताजनक है। पुलिस ने हिदायत दी है कि ऐसी कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत नैशनल साइबर क्राइम हैल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या अपने नजदीकी साइबर पुलिस थाने से संपर्क करें।







