मां की तलवार से हत्या करने वाले बेटे को आजीवन कारावास, 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया

Khabron wala 

शिमला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-द्वितीय यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने वर्ष 2022 में जुन्गा के थुंड गांव में अपनी मां बिमला देवी की तलवार से हत्या करने के मामले में दोषी रामेश्वर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और एसएफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।

जिला शिमला के जुन्गा क्षेत्र के गांव थुंड में अपनी मां की निर्मम हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी रामेश्वर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-द्वितीय यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने आईपीसी धारा 302 (हत्या) और धारा 324 (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना) के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर दोषी को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 26 जुलाई 2022 की रात करीब 11:30 बजे रामेश्वर ने अपने घर में तलवार (सीधी धार के हथियार) से अपनी मां बिमला देवी पर हमला कर दिया। इसमें मां के सिर, चेहरे, गर्दन और हाथों पर कई गहरी चोटें आईं तथा उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान जब बड़े भाई प्रकाश चंद मां को बचाने आए तो रामेश्वर ने उन पर भी तलवार से हमला कर दिया। इससे प्रकाश चंद घायल हो गए।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने इस संबंध में केस दर्जकर मामले की जांच शुरू की और अदालत में चार्जशीट पेश की। अदालत में मृतका के बेटे सुनील कुमार, घायल प्रकाश चंद और बहनोई हितेंद्र शर्मा ने अदालत में आरोपी को घटनास्थल पर तलवार लेकर मां पर हमला करते देखने की गवाही दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई धारदार चोटों की बात की पुष्टि हुई। प्रकाश चंद की एमएलसी में भी तलवार जैसी चोटें पाई गईं। इसके अलावा घटनास्थल से बरामद बटन आरोपी की शर्ट से मैच किया। तलवार पर और घटनास्थल पर मिले खून के नमूनों का डीएनए आरोपी से मैच हुआ। एसएफएसएल रिपोर्ट ने वैज्ञानिक रूप से आरोपी की मौजूदगी साबित की। आरोपी के पास पुरानी पारिवारिक तलवार होने का भी सबूत मिला। सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों की गवाही को विश्वसनीय माना।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि संपत्ति विवाद था और उन्हें झूठा फंसाया गया जोकि खारिज कर दी गई। अदालत ने कहा कि परिवार के सदस्यों की गवाही प्राकृतिक थी और कोई ठोस सबूत बचाव पक्ष नहीं पेश कर सका। न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले को रिजनेबल डाउट से परे साबित किया है। सजा सुनाने से पहले जेल अधीक्षक और जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी से आरोपी के आचरण, मिटिगेटिंग और एग्रेवेटिंग फैक्टर्स की रिपोर्ट मांगी गई। अदालत ने सभी गवाहों और तथ्यों को सुनने के बाद अब रामेश्वर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी जिला उप न्यायवादी सुनील शर्मा ने की।

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