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बिना छुट्टी जैसलमेर घूमने वाले नायाब तहसीलदार इंद्र कुमार का काला कारनामा, माजरा तहसील में जीपीए का खेल , हिमाचल में हुई जीपीए की हरियाणा में दर्जनों FIR दर्ज , अधिकारी पुलिस रडार पर

जैसलमेर घूमने वाले और छुट्टी देने वाले नायाब तहसीलदारों और स्टाफ पर डीसी सिरमौर आखिर क्यों मेहरबान है कि अभी तक किसी को भी सस्पेंड नहीं किया गया है सिरमौर दौरे पर आ रहे राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के सामने यह मुद्दा उठाया जाएगा और मुख्यमंत्री को लिखित शिकायतपत्र भी भेजा जाएगा

गौरतलब है कि खबरों वाला द्वारा सबसे पहले खबर प्रकाशित की गई थी कि माजरा उप तहसील के नए तहसीलदार इंद्र कुमार स्टाफ के सहित छुट्टियां मना रहे हैं जबकि रिकॉर्ड में वह मेडिकल लीव पर थे वही सारे स्टाफ को छुट्टी देने वाले पांवटा साहिब के नायब तहसीलदार रविंद्र सिसोदिया भी सुर्खियों में थे खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया था और सभी की लोकेशन मांगी गई थी और नोटिस जारी किया गया था यह कार्रवाई एसडीएम पावटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा द्वारा की गई थी इस विषय को लेकर खबरोंवाला के संपादक जसवीर सिंह हंस को अनेक मीडिया हाउस और स्थानीय लोगों सहित आला प्रशासन के लोगों के फोन आ रहे हैं

अब इस मामले में राज्य स्तर पर सभी मीडिया द्वारा मुद्दा उठाया गया उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने नायब तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था सूत्रों का कहना है कि संलिप्त कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए थी । परंतु मामला दबा दिया गया है

जानकारी के अनुसार 12 और 13 फरवरी को नायब तहसीलदार सहित तीन पटवारी, एक कानूनगो और दो महिलाओं समेत तीन क्लर्क राजस्थान गए थे। संबंधित कर्मियों ने कथित तौर पर रिश्तेदार की शादी और बीमारी का हवाला देकर कैजुअल लीव ली, जबकि माजरा के तहसीलदार इंद्र कुमार मेडिकल लीव पर थे। मामला तब खुला जब यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं। खबरों वाला ने इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट प्रशासन तक पहुंचाए, जिसके बाद पांवटा साहिब प्रशासन हरकत में आया। संबंधित कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

बताया जा रहा है कि जीपीए करने वाले कुछ दलालों द्वारा यह यात्रा प्रायोजित की गई थी , माजरा उप तहसील और पांवटा साहिब तहसील पहले भी दूसरे राज्यों के जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) से जुड़े मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं। जानकार इसे अपनी तरह का अनोखा मामला बता रहे हैं, क्योंकि एक साथ राजस्व अमले के कई अधिकारियों-कर्मचारियों का अवकाश लेकर बाहर जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वही सारे स्टाफ को छुट्टी देने वाले पांवटा साहिब के नायब तहसीलदार रविंद्र सिसोदिया को प्रशासन बचाने में जुटा हुआ है

यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो निलंबन से लेकर विभागीय जांच तक की कार्रवाई संभव है। फिलहाल, राजस्व विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही पर उठे सवालों ने इस मामले को जिले की सबसे चर्चित प्रशासनिक घटना बना दिया है।

हिमाचल प्रदेश की माजरा तहसील में हरियाणा उत्तर प्रदेश की जीपीए करने का मामला इस समय सुर्खियों में है रोजाना करोड़ों रुपए का लेनदेन हो रहा है स्थानीय लोगों को रजिस्ट्री करने में दिक्कत आ रही है क्योंकि स्लॉट एडवांस बुक है और बाहरी राज्यों की जीपीए के लिए तहसीलों के बाहर हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश की गाड़ियों की लाइन लगी रहती हैं माजरा के तहसीलदार इंद्र कुमार ने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली है परंतु विजिलेंस भी अभी शिकायत का इंतजार कर रही है

वही बताया जा रहा है कि हरियाणा की गलत हिमाचल प्रदेश जीपीए करने के मामले में हरियाणा में दर्जनों मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और अधिकारी हरियाणा पुलिस की रडार पर है परंतु अभी तक हिमाचल प्रदेश की विजिलेंस ने इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की है जबकि मुख्यमंत्री मुख्य सचिव राजस्व और डीसी और एडीसी सिरमौर को इस सारे खेल के बारे में पता है

हरियाणा से गाजियाबाद से वकील फर्जी तरीके से हिमाचल प्रदेश जीपीए करवाने में लगे हैं इन मामलों में भी कई गिरफ्तारियां पहले हिमाचल से हो चुकी है इस विषय में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच करवा कर मामला दर्ज करने की बात कही जा रही है ऐसे में देखना यह है की जांच के बाद यह खुलासा होगा की कानूनी रूप से सही ठहराई जा रही जीपीए की एवरेज में कितना फर्जी काम हुआ है बताया जा रहा है कि हजारों की तादात में जीपीए करवाई जा रही है

बताया जा रहा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को एक जीपीए के लगभग ₹25000 रिश्वत के रूप में दिए जा रहे हैं व वकील भी मोटी फीस ले रहे हैं बाहरी राज्यों से आकर वकील लगातार महंगे होटलों में ठहरे हुए हैं और रोजाना के लाखों रुपए कमा रहे हैं रोजाना एक तहसील में दर्जनों जीपीए हो रही है बताया जा रहा है कि 2 महीने तक के स्लॉट एडवांस बुक हो गए हैं और स्थानीय लोग दर दर की ठोकरे खा रहे हैं स्थानीय लोगों ने बाहरी जीपीए बंद कर स्थानीय लोगों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता देने की मांग की है

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