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मंडी की एक अदालत ने चैक बाऊंस के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को कारावास और भारी भरकम मुआवजे की सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1, मंडी की अदालत ने आरोपी गोपाल भारती को दोषी करार देते हुए शिकायतकर्ता को कुल 10 लाख रुपए का मुआवजा देने और जेल की सजा भुगतने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार शिकायतकर्ता शगुन ठाकुर ने आरोपी गोपाल भारती से मनाली (जिला कुल्लू) में एक कॉटेज और रेस्तरां लीज पर लिया था। 25 मार्च, 2019 को दोनों पक्षों के बीच लीज एग्रीमैंट रद्द करने पर सहमति बनी। हिसाब-किताब के बाद यह तय हुआ कि आरोपी गोपाल भारती, शिकायतकर्ता को 5 लाख रुपए लौटाएगा, जो अतिरिक्त भुगतान के रूप में उसके पास जमा थे। इस भुगतान के लिए आरोपी ने हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक, शाखा प्रीणी (मनाली) के 2.50-2.50 लाख रुपए के दो चैक जारी किए थे। जब शगुन ठाकुर ने इन चैकों को पंजाब नैशनल बैंक, मोती बाजार मंडी में लगाया तो खाते में पैसे न होने के कारण वे बाऊंस हो गए।
आरोपी की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान आरोपी ने माना कि चैक उसी ने जारी किए थे और वे बाऊंस भी हुए, लेकिन उसने दावा किया कि वह 50 प्रतिशत राशि लौटा चुका है। हालांकि, वह कोर्ट में इसका कोई सबूत पेश नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति चैक पर हस्ताक्षर स्वीकार कर लेता है तो कानूनन यह माना जाता है कि चैक किसी देनदारी को चुकाने के लिए दिया गया था।
अदालत का फैसला
दोषी पाए जाने पर अदालत ने दोनों चैकों के लिए अलग-अलग सजा सुनाई है। पहले चैक के लिए 5 महीने का साधारण कारावास और 5 लाख रुपए का मुआवजा और दूसरे चैक के लिए 5 महीने का साधारण कारावास और 5 लाख रुपए का मुआवजा। इस प्रकार आरोपी को कुल 10 लाख रुपए शिकायतकर्ता को देने होंगे। मुआवजा न देने की स्थिति में आरोपी को 5-5 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।











