पांवटा साहिब और नाहन माजरा मैं फर्जी जीपीए का खेल , हरियाणा में दर्जनों FIR दर्ज , पांवटा साहिब और नाहन , माजरा के अधिकारी पुलिस रडार पर

पांवटा साहिब और नाहन माजरा मैं फर्जी जीपीए का खेल , हरियाणा में दर्जनों FIR दर्ज , पांवटा साहिब और नाहन , माजरा के अधिकारी पुलिस रडार पर

पढ़े कैसे तहसीलदार शिलाई और पांवटा साहिब का वकील फर्जी जीपीए में हुए थे गिरफ्तार अंबाला जेल में काटी थी सजा

हिमाचल के पांवटा साहिब और नाहन माजरा में हरियाणा उत्तर प्रदेश की जीपीए करने का मामला इस समय सुर्खियों में है रोजाना करोड़ों रुपए का लेनदेन हो रहा है स्थानीय लोगों को रजिस्ट्री करने में दिक्कत आ रही है क्योंकि स्लॉट एडवांस बुक है और बाहरी राज्यों की जीपीए के लिए तहसीलों के बाहर हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश की गाड़ियों की लाइन लगी रहती हैं नाहन के तहसीलदार उपेंद्र कुमार ने मजरा तहसील के इंदर कुमार ने और पांवटा साहिब तहसील के रविंद्र सिसोदिया ने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली है

 

वही बताया जा रहा है कि हरियाणा की गलत जीपीए करने के मामले में हरियाणा में दर्जनों मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और अधिकारी हरियाणा पुलिस की रडार पर है बताया जा रहा है कहीं पर मरे हुए व्यक्ति की भी जीपीए कर दी गई कई मामलों में तो गलत कागजों के साथ जीपीए कर दी गई एक मामले में 300 की जगह 500 फुट की जीपीए कर दी गई परंतु अभी तक हिमाचल प्रदेश की विजिलेंस ने इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की है जबकि मुख्यमंत्री मुख्य सचिव राजस्व और डीसी सिरमौर को इस सारे खेल के बारे में पता है

मामला सन 2000 का है जब तहसीलदार शिलाई के डी प्रेमी और पांवटा साहिब का वकील अशोक गुप्ता GPA जर्नल पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी करने के मामले में गिरफ्तार हुए थे बताया जाता है कि अंबाला पुलिस ने उनको गिरफ्तार किया था यह मामला तब सामने आया था जब एक एनआरआई ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी जमीन पर किसी ने मकान का निर्माण कर दिया है जब बाद में हरियाणा पुलिस ने खुलासा किया कि यह सारा काम फर्जी कागजों के आधार पर धोखाधड़ी कर किया गया है जिसके बाद 420 के केस में अधिकारी और उसके साथ मिले वकील को जेल की हवा खानी पड़ी थी हरियाणा पुलिस ने धोखाधड़ी के इस मामले में आरोपियों को पहले रिमांड पर लिया था जिसके बाद वह ज्यूडिशियल रिमांड पर अंबाला जेल में लंबे समय तक रहे थे वही उसे समय तहसील के कर्मचारी किसी तरह बच गए थे

आज लगभग 25 साल बाद फिर ऐसा ही हो रहा है हरियाणा हिमाचल से गाजियाबाद से वकील फर्जी तरीके से जीपीए करवाने में लगे हैं इस विषय में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच करवा कर मामला दर्ज करने की बात कही जा रही है ऐसे में देखना यह है की जांच के बाद यह खुलासा होगा की कानूनी रूप से सही ठहराही जा रही जीपीए की एवरेज में कितना फर्जी काम हुआ है बताया जा रहा है कि हजारों की तादात में जीपीए करवाई जा रही है

बताया जा रहा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को एक जीपीए के लगभग ₹10000 रिश्वत के रूप में दिए जा रहे हैं वह वकील भी मोटी फीस ले रहे हैं बाहरी राज्यों से आकर वकील लगातार महंगे होटलों में ठहरे हुए हैं और रोजाना के लाखों रुपए कमा रहे हैं रोजाना एक तहसील में करीब 50 जीपीए हो रही है बताया जा रहा है कि 2 महीने तक के स्लॉट एडवांस बुक हो गए हैं और स्थानीय लोग दर दर की ठोकरे खा रहे हैं स्थानीय लोगों ने बाहरी जीपीए बंद कर स्थानीय लोगों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता देने की मांग की है

Related Posts

Next Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!