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Himachal : पत्नी ने सैल्यूट कर किया शहीद पति को विदा, 11 वर्षीय बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना का वीर सपूत नायब सूबेदार कुलवंत सिंह अरुणाचल प्रदेश में सड़क हादसे में बलिदान हो गया। ग्राम पंचायत घालूवाल के गांव जेजों मोड़ में आज सुबह पार्थिव देह पहुंची। पार्थिव देह के गांव पहुंचते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

सूबेदार कुलवंत की अंतिम विदाई
बड़ी संख्या में लोग अपने वीर जवान को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़े। शहीद की पत्नी ने नम आंखों से सैल्यूट कर पति को विदा किया। जबकि, 11 वर्षीय बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद कुलवंत की अंतिम यात्रा के समय वीर जवान अमर रहें के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।
जानकारी के अनुसार, कुलवंत सिंह का निधन एक सड़क हादसे में हुआ। ये दर्दनाक हादसा अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र रेड्डी गांव के पास हुआ। सेना का एक वाहन ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत परिचालन ड्यूटी के लिए गेलेमो से ताकसिंग की ओर जा रहा था।

इसी दौरान अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में जा गिरा। हादसा इतना भयानक था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। इस दुर्घटना में नायब सूबेदार कुलवंत सिंह और एक अन्य सैनिक नायक प्रदीप कुमार शर्मा वीरगति को प्राप्त हो गए, जबकि वाहन चालक को सुरक्षित बताया जा रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण घटना की विस्तृत जानकारी मिलने में कुछ समय लगा।

नायब सूबेदार कुलवंत सिंह भारतीय सेना की 56 आर्टिलरी ब्रिगेड की 908 फील्ड रेजिमेंट में तैनात थे। उनके साथ उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी 18 सिख रेजिमेंट के नायक प्रदीप कुमार शर्मा भी देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। सेना के अधिकारियों ने दोनों वीर जवानों के बलिदान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मंगलवार को सेना के अधिकारियों द्वारा शहीद कुलवंत सिंह की पार्थिव देह हवाई मार्ग से चंडीगढ़ लाई गई। इसके बाद सेना के काफिले के साथ पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव जेजों मोड़ लाया गया। बुधवार सुबह पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

इस दौरान सेना के जवानों ने सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के समय परिजनों के साथ-साथ क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। हर किसी की आंखें नम थीं और वातावरण “भारत माता की जय” तथा “शहीद कुलवंत सिंह अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।

दो महीने पहले हुई थी प्रमोशन
परिजनों ने बताया कि कुलवंत सिंह को करीब दो महीने पहले ही नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिली थी। पदोन्नति के बाद उनकी तैनाती अमृतसर से अरुणाचल प्रदेश कर दी गई थी। वर्ष 1985 में जन्मे कुलवंत सिंह साल 2002 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और तब से लगातार देश की सेवा में जुटे हुए थे।

कुलवंत अपने पीछे पत्नी, 11 और 9 वर्ष के दो बेटे और एक भाई को छोड़ गए हैं। पिता की शहादत के बाद दोनों बेटे खामोश हो गए हैं। कुलवंत सिंह का परिवार लंबे समय से सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता स्वर्गीय गरीब दास भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके थे और सेवानिवृत्त सैनिक थे।

गांव के लोगों का कहना है कि कुलवंत सिंह बचपन से ही अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। सेना में भर्ती होकर उन्होंने अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया। उनके बलिदान की खबर मिलते ही पूरे जेजों मोड़ गांव में मातम छा गया।

गांव के लोगों का कहना है कि कुलवंत सिंह बचपन से ही अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। सेना में भर्ती होकर उन्होंने अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया। उनके बलिदान की खबर मिलते ही पूरे जेजों मोड़ गांव में मातम छा गया।

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