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हिमाचल पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए एलएसडी (LSD) तस्करी के मुख्य सरगना को गुरुग्राम से गिरफ्तार करने के बाद एक बार फिर से इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है. शिमला में स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए एलएसडी तस्करी मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) कुल्लू के चार पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.
STF के चार कर्मी गिरफ्तार!
पुलिस के अनुसार, 10 मार्च 2026 को गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल शिमला की टीम ने BCS क्षेत्र में छापा मारकर 562 स्ट्रिप्स एलएसडी बरामद की थी. बरामद LSD की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ रुपए आंकी गई है. इस दौरान आरोपी संदीप शर्मा (निवासी मोगा, पंजाब, वर्तमान पता सुंदरनगर) और एक महिला आरोपी प्रिया शर्मा (26 वर्ष, निवासी रेणुकाजी, जिला सिरमौर) को गिरफ्तार किया गया था. तफ्तीश के दौरान संदीप शर्मा ने खुलासा किया कि वह पिछले करीब 10 वर्षों से कुल्लू क्षेत्र में एलएसडी तस्करी से जुड़ा हुआ है और यह नशीला पदार्थ केरल निवासी नेविल हैरिसन से खरीदता रहा है. आरोपी ने यह भी बताया कि वह STF कुल्लू के कुछ कर्मचारियों के लिए मुखबिर के तौर पर काम कर रहा था.
शिमला पुलिस ने STF कर्मियों को पकड़ा
ASP अभिषेक ने बताया कि, “मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया. साइबर सेल और एएनटीएफ स्टेट सीआईडी शिमला की मदद से की गई जांच में पाया गया कि 8 मार्च को सभी आरोपी एक ही स्थान पर मौजूद थे. साथ ही एसटीएफ कार्यालय के रिकॉर्ड में भी किसी विशेष ऑपरेशन की जानकारी दर्ज नहीं मिली.
आरोप है कि, 7 मार्च को संदीप ने एसटीएफ को सूचना दी थी कि नेविल हैरिसन 8 मार्च को भुंतर में एलएसडी और एमडीएमए लेकर पहुंचेगा. इस सूचना पर STF के कुछ कर्मचारी मौके पर पहुंचे और नेविल हैरिसन को हिरासत में लिया. आरोप के अनुसार, नेविल के पास से करीब 1450 स्ट्रिप्स एलएसडी और 30 ग्राम एमडीएमए बरामद हुई, लेकिन इस बरामदगी पर कोई आधिकारिक मामला दर्ज नहीं किया गया. जांच में सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने नशीले पदार्थ का बड़ा हिस्सा अपने पास रख लिया और बाद में संदीप को 616 स्ट्रिप्स एलएसडी दी. इस पूरे मामले की पुष्टि आरोपी नेविल हैरिसन ने भी पूछताछ में की है.
क्या है LSD ड्रग?
एलएसडी (LSD – Lysergic acid diethylamide) एक अत्यधिक शक्तिशाली अर्ध-संश्लेषित साइकेडेलिक (Psychotropic Substances ) मनोविकृति नाशक नशीला पदार्थ है, जो इर्गोट फंगस से प्राप्त होता है. यह रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होता है, जो मतिभ्रम (Hallucinations) मानसिक प्रभाव पैदा करता है. इसे ‘एसिड’ के नाम से भी जाना जाता है, जिसे आमतौर पर छोटी पेपर स्ट्रिप्स (ब्लॉटर पेपर) के रूप में लिया जाता है. इसके प्रभाव 6 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रहते हैं.
ASP अभिषेक ने बताया कि, “तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर एसटीएफ कुल्लू के पुलिसकर्मी राजेश कुमार, समीर, नितेश और अशोक कुमार की संलिप्तता पाई गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य पहलुओं की भी गहनता से पड़ताल की जा रही है.”
एक करोड़ से अधिक से एलएसडी के तार सीधे जिला सिरमौर के ददाहु से जुड़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिला सिरमौर में खुफिया एजेंसीज को इस पूरे प्रकरण पर कितनी जानकारी थी और अगर जानकारी नहीं थी तो इतनी बड़ी खेप के साथ तस्कर काम कर रहे थे । संभव है कि जिला सिरमौर से और भी लोगों के तार इस तस्करी से जुड़ सकते हैं।









