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हिमाचल प्रदेश इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ, नीरस, दिशा और विजन हीन बजट : जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ, नीरस, दिशा और विजन हीन बजट : जयराम ठाकुर
सुक्खू सरकार लगातार राजस्व घाटा बढ़ा और पूंजीगत निवेश घटा रही है

शिमला : बजट अनुमान 2026- 27 पर मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयरान ठाकुर ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ निराश और दिशाहीन बजट है जिसमें प्रदेश के लिए कुछ नहीं है। इस प्रदेश का बजट लगातार प्रदेश की अपेक्षाओं पर न तो खरा उतर रहा है और ना ही बिकाश को गति देने में क़ामयाब हो रहा है। रुको सरकार में प्रदेश का राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से अब तक राजकोषीय घाटा क्रमशः 10,300 करोड़, हिमाचल 10,337 करोड़ , 12,414 करोड़ और 9896 करोड़ हो गया है इसी वर्षों में प्रदेश का पूंजीगत निवेश क्रमशः 6,781 करोड़, 6239 करोड़, 3941करोड़ और 3089 करोड़ रह गया। यानी विकास को पूर्ण विराम लग चुका है। वर्ष 2025-26 के लिए 58514 करोड़ का मुख्य बजट था। वित्तीय 2026-27 के किए बजट 54928 करोड़ का है। पिछले बार से 3586 करोड़ कम है। यह पिछले साल के बजट से 6.13 कम है। दुनिया में दुनिया भर में बजट अनुमान हमेशा आगे की राह दिखाते हैं लेकिन सुक्खू सरकार का यह बजट प्रदेश वो पीछे की दिशा में ले जाने वाला बजट बन कर रह गया है। यह बजट सुक्खू सरकार के पहले 53,412 करोड़ के बजट के लगभग बराबर है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस सरकार की वित्तीय प्रबंधन की हकीकत सामने आ चुकी है। हर बार सरकार कर्मचारियों के वेतन में किस प्रकार कमी ला सके इस दिशा मे काम करते हैं। 3 साल से व्यवस्था परिवर्तन और प्रदेश हित का नारा लगाते लगाते प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है। जो भी घोषणाएं मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में की हैं वह भी पिछली बजट घोषणाओं की तरह या तो कागजों में धूल फांकती रह जाएंगी या फिर चुनावी गारंटीयों की तरह गोलमोल करके उनके पूरे होने करने के विज्ञापन पूरे प्रदेश में लग जाएंगे और लोग दफ्तरों के चक्कर काटते रहेंगे। यह सरकार सिर्फ अपना समय काट रही है। क्योंकि इस समय सरकार के पास करने को कुछ है नहीं और मुख्यमंत्री को अच्छे से पता है कि चुनाव के बाद हिमाचल से कांग्रेस इस तरह गायब हो जाएगी जैसे पूरे देश से गायब हो गई है। इसलिए इस तरीके के हथकंडे अपना कर अपनी लायबिलिटीज टाल रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली बार के बजट अनुमानों में जिस प्रकार से असमानता थी वह सप्लीमेंट्री बजट में सामने आई। कंट्री कन्यादान योजना का 10% हिस्सा भी आवंटित बजट का खर्चकर पाए। इसी तरीके से शगुन योजना का मात्र 17% हिस्सा तथा महिला सम्मान निधि का 3.7% फीफा वित्तीय वर्ष के तीन तिमाहियों में खर्च हो पाया। इसी प्रकार से उनकी ऑर्गेनिक फार्मिंग की योजना भी सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गई। क्योंकि कल 1643 किसानों से ही सरकार द्वारा दो 2.69 करोड़ रुपए की खरीदारी हो पाई। इस योजना के लाभार्थियों को प्रति किसान 14000 रुपए भी नहीं मिले। जबकि इन योजनाओं पर प्रदेश सरकार द्वारा सैकड़ों करोड़ों रुपए खर्च किए गए। प्रदेश के कोने-कोने में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए अखबारों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिए गए। जयराम ठाकुर ने कहा यह बजट पूर्णतया दिशाहीन और दूरदर्शिताहीन बजट है जिसमें प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं हैं। 29 साल के अपने राजनीतिक कार्यकाल में मैंने ऐसा दिशाहीन बजट नहीं देखा।

प्रेस रिलीज 02

हिमाचल बजट सत्र: एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी के खिलाफ भाजपा का विधानसभा में जोरदार प्रदर्शन और सरकार को घेराबंदी की चेतावनी

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रदेश का बजट पेश किए जाने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी विधायक दल ने सरकार की नीतियों, विशेषकर हाल ही में बढ़ाए गए एंट्री टैक्स के खिलाफ सदन के बाहर और भीतर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में एकजुट हुए विपक्ष ने सरकार पर आम जनता और व्यापारी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का गंभीर आरोप लगाते हुए इस टैक्स वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायकों ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि एंट्री टैक्स में की गई भारी वृद्धि न केवल परिवहन क्षेत्र को प्रभावित करेगी, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम महंगाई के रूप में आम आदमी की रसोई तक पहुंचेंगे। जयराम ठाकुर ने तर्क दिया कि कमर्शियल वाहनों पर लगने वाले इस अतिरिक्त कर से माल ढुलाई और परिवहन लागत में सीधा इजाफा होगा, जिससे बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ना तय है।

विपक्ष ने सरकार की इस नीति को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए चेतावनी दी कि हिमाचल द्वारा उठाए गए इस कदम से पड़ोसी राज्यों के साथ भी व्यापारिक संबंधों में तनाव आ सकता है। विशेष रूप से पंजाब का संदर्भ देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि हिमाचल सरकार अपनी सीमाओं पर कर बढ़ाती है, तो जवाबी कार्रवाई में अन्य राज्य भी हिमाचल की गाड़ियों पर भारी टैक्स लगा सकते हैं, जिससे राज्य का अंतर्राज्यीय व्यापार पूरी तरह चरमरा जाएगा और स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। भाजपा विधायक दल ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए सरकार से मांग की कि बजट भाषण से पूर्व ही इस जनविरोधी निर्णय को वापस लेकर जनता की चिंताओं का समाधान किया जाए, अन्यथा पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक अपना आंदोलन और अधिक तेज करेगी।

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