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हिमाचल प्रदेश में अब सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता है. आगामी पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासन ने ये सख्त रुख अपनाया है. जिला शिमला के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) द्वारा जारी निर्देशों में साफ किया गया है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाएगा.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
ये फैसला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है. हाईकोर्ट ने गुरदेव बनाम राज्य हिमाचल प्रदेश मामले में 20 मई 2025 को स्पष्ट किया था कि जिन लोगों ने अतिक्रमित भूमि के नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) के लिए आवेदन किया है, वे भी चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे. ये कार्रवाई हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1) (c) के तहत की जा रही है, जिसमें अतिक्रमण करने वालों को चुनावों के लिए अयोग्य घोषित करने का प्रावधान है.
जिला प्रशासन ने सभी उपमंडल अधिकारियों (SDM) और रिटर्निंग ऑफिसर-cum-ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों की जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों और चुनाव कर्मियों तक पहुंचाएं. जिला प्रशासन का कहना है कि इस कदम से पंचायत चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी तथा अवैध कब्जों पर भी अंकुश लगेगा.

गौरतलब है कि प्रदेश में चिट्टे में संलिप्त व्यक्ति भी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश में 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले प्रदेश में पंचायत राज संस्था के चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं.










