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RDG ग्रांट विवाद में उतरे जयराम ठाकुर, बताई ग्रांट बंद होने की असली वजह; सुक्खू सरकार को दी ये सलाह

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) के बंद होने के मुद्दे पर राज्य की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस द्वारा केंद्र की भाजपा सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मोर्चा संभाल लिया है। शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने दो-टूक कहा कि ग्रांट को लेकर रोना रोने के बजाय सुक्खू सरकार यह बताए कि उन्होंने 16वें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश का पक्ष प्रभावी ढंग से क्यों नहीं रखा।

‘बिना किसी ठोस कार्ययोजना के ग्रांट पर निर्भर रहना विरोधाभासी’

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का दावा किया था। ठाकुर ने पूछा, “यदि मुख्यमंत्री का लक्ष्य हिमाचल को आत्मनिर्भर और सबसे अमीर बनाना है, तो वह अपना विजन जनता के सामने रखें। बिना किसी ठोस कार्ययोजना के केवल ग्रांट पर निर्भर रहना विरोधाभासी है।”

 

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी हमला

राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए जयराम ठाकुर ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अन्य राज्यों को यह विशेष ग्रांट देने का विरोध किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हिमाचल कांग्रेस के नेताओं को अपने ही दल की कर्नाटक सरकार से सवाल पूछना चाहिए कि उन्होंने हिमाचल के हितों के खिलाफ रुख क्यों अपनाया।

 

जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को दी ये सलाह

देश की आर्थिक दिशा पर बात करते हुए जयराम ठाकुर ने केंद्रीय बजट की तुलना की। उन्होंने कहा कि 2013-14 का बजट ‘सब्सिडी’ पर आधारित था, जो विकास की रफ्तार को धीमा करता था। इसके विपरीत, बजट 2026-27 पूरी तरह से ‘पूंजीगत निवेश’ (Capital Investment), बुनियादी ढांचे के निर्माण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर केंद्रित है। उन्होंने सुक्खू सरकार को सलाह दी कि वे केवल शिकायतें करने के बजाय केंद्र के पास मजबूत प्रजेंटेशन लेकर जाएं और विकास के लिए फंड लाएं।

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