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बीपीएल परिवारों की पहचान के नियमों में आंशिक ढील दी गई है। ग्रामीण विकास विभाग ने बीपीएल सर्वे के चौथे चरण के लिए समावेशन और बहिष्करण के मानदंडों को उदार बनाते हुए संशोधन जारी किया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद उन जरूरतमंद परिवारों को भी बीपीएल सूची में शामिल करना है, जो अब तक छूट रहे थे। आदेशों के अनुसार बीपीएल सर्वे की प्रक्रिया पहले ही चरणबद्ध तरीके से चल रही है।
पहले, दूसरे और तीसरे चरण की चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उनकी अंतिम सूचियां खंड स्तरीय समितियों द्वारा जारी की जा चुकी हैं। अब चौथे चरण के लिए पात्रता शर्तों में कुछ नई श्रेणियां जोड़ी गई हैं। संशोधित नियमों के अनुसार ऐसे परिवार जिनके मुखिया को 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता है, उन्हें बीपीएल सूची में शामिल किए जाने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, वे परिवार जिनके सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम 80 दिन काम किया है, भी पात्र माने जाएंगे।
सरकार ने साफ किया है कि इन उदार श्रेणियों के तहत पहले, दूसरे और तीसरे चरण में आए आवेदनों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही नए आवेदन 17 फरवरी तक स्वीकार किए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया के बाद खंड स्तरीय समिति 25 फरवरी तक पंचायतवार बीपीएल के चौथे चरण की अंतिम सूची प्रकाशित करेगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहले तीन चरणों में की गई सभी कार्यवाहियां, तैयार सूचियां और लिए गए फैसले यथावत रहेंगे। चौथे चरण में सत्यापन, अनुमोदन, अपील और समय-सीमा से जुड़ी प्रक्रिया पहले जारी नियमों के अनुसार ही लागू रहेगी।










