Khabron wala
हिमालय की गोद में बसे ऊंचे पहाड़ों के लिए पिछला पखवाड़ा किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ है। जहाँ एक तरफ जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी ग्लेशियरों का अस्तित्व मिटा रही थी, वहीं हाल ही में हुई भारी बर्फबारी ने इन्हें ‘ऑक्सीजन’ देने का काम किया है। लेकिन सुकून की यह धूप ज्यादा लंबी नहीं चलेगी, क्योंकि आसमान में एक बार फिर बदलाव की इबारत लिखी जा रही है।
ग्लेशियरों का सुरक्षा कवच: 15-20 फीट की चादर
बीते 11 दिनों के भीतर कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति सहित जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की ऊंची चोटियों पर कुदरत जमकर मेहरबान हुई है। लगभग पांच बार हुए हिमपात ने ग्लेशियरों पर 15 से 20 फीट मोटी बर्फ की परत बिछा दी है।
तापमान में गिरावट आने से बर्फ के पिघलने की रफ्तार थम गई है। तेजी से सिकुड़ते ग्लेशियरों के लिए यह बर्फबारी एक ढाल की तरह काम करेगी, जिससे आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका भी कम होगी।
मौसम का नया मिजाज: फिर लौट रही है हलचल
वर्तमान में भले ही पूरा हिमाचल धूप की गर्माहट महसूस कर रहा हो और ऊना जैसे इलाकों में पारा 25.6 डिग्री तक जा पहुँचा हो, लेकिन रविवार की शांति के बाद सोमवार से हालात बदलने वाले हैं।
आगामी मौसम का खाका:
9 फरवरी को ऊंचे पहाड़ (किन्नौर, चंबा, कुल्लू आदि) में मौसम में बदलाव और हल्की बर्फबारी की शुरुआत और 10 फरवरी को हिमाचल प्रदेश में व्यापक बारिश और हिमपात की संभावना है। 11 फरवरी को राज्य के कई हिस्सो में खराब मौसम का असर जारी रहेगा। 12 फरवरी को मौसम साफ होने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 10 फरवरी को बादलों के बरसने के साथ-साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। बिजली कड़कने और अंधड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
रात के समय हिमाचल के पांच प्रमुख जिलों (सोलन, कुल्लू, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति) में कड़ाके की ठंड बनी हुई है, जहाँ पारा 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे टिका हुआ है। अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान थोड़ा बढ़ेगा, लेकिन बारिश और बर्फबारी के बाद एक बार फिर ठिठुरन बढ़ने के आसार हैं।








