हिमाचल में उम्रकैदियों की समयपूर्व रिहाई नीति में बड़ा बदलाव

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई को लेकर नई और संशोधित नीति अधिसूचित कर दी है। नई नीति के तहत अब राज्य में उम्रकैदियों की समयपूर्व रिहाई पर फैसला हिमाचल प्रदेश स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) करेगा। बोर्ड कैदियों की सजा की समीक्षा कर पात्र मामलों में समयपूर्व रिहाई की सिफारिश करेगा। साथ ही राज्य सरकार ने सजा समीक्षा के लिए स्थायी बोर्ड का गठन किया है। बोर्ड में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा सचिव (कानून), हाईकोर्ट द्वारा नामित जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी, डीजीपी द्वारा नामित आईजी रैंक का पुलिस अधिकारी, एक महिला सदस्य तथा डीजी/एडीजी (जेल) सदस्य सचिव होंगे। बोर्ड की बैठक के लिए कम से कम 4 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

नई नीति के अनुसार उम्रकैद का दोषी कैदी 14 वर्ष की वास्तविक सजा (बिना रिमिशन) पूरी करने के बाद ही समीक्षा के योग्य होगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि 14 वर्ष पूरे होना स्वतः रिहाई का अधिकार नहीं होगा। बोर्ड अपराध की प्रकृति, जेल में कैदी के आचरण, सुधार और पुनर्वास की संभावना तथा पारिवारिक-सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगा। बलात्कार के साथ हत्या, आतंकी घटनाओं में हत्या, जेल या पैरोल के दौरान हत्या, गैंगस्टर, कॉन्ट्रैक्ट किलर, ड्रग तस्कर तथा जिन मामलों में मृत्युदंड को उम्रकैद में बदला गया है, ऐसे गंभीर अपराधों में दोषियों के लिए कुल सजा अवधि 20 से 25 वर्ष तक हो सकती है।

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समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया 3 चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में जेल अधीक्षक हर 4 महीने में पात्र कैदियों की सूची डिजिटल रूप में तैयार करेंगे और उनकी व्यक्तिगत केस फाइल बनाई जाएगी। दूसरे चरण में जिला मैजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी और सजा देने वाले न्यायाधीश से रिपोर्ट ली जाएगी, जिसे अधिकतम 2 माह में पूरा करना होगा। तीसरे चरण में स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की बैठक अप्रैल, अगस्त और दिसम्बर में होगी, जिसमें बहुमत से निर्णय लिया जाएगा। बोर्ड की सिफारिश मिलने के 1 माह के भीतर राज्य सरकार को अंतिम फैसला करना होगा।

रिहाई पर सख्त शर्तें

रिहाई की स्थिति में कैदी को शांति व सदाचार का बांड भरना होगा और निर्धारित अवधि तक नजदीकी थाने में हाजिरी देनी होगी। शिकायतकर्त्ता या गवाहों से संपर्क, हथियार रखने और बिना अनुमति जिला छोड़ने पर प्रतिबंध रहेगा। शर्तों के उल्लंघन पर दी गई रिमिशन रद्द की जा सकेगी।

दया याचिका का प्रावधान

गंभीर बीमारी, वृद्धावस्था या मानवीय आधार पर उम्रकैदी राज्यपाल के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दया याचिका भी प्रस्तुत कर सकेंगे। सभी कानूनी उपाय समाप्त होने के बाद ही ऐसी याचिका पर विचार किया जाएगा। स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड की सिफारिश पर राज्यपाल अंतिम निर्णय लेंगे।

पारदर्शिता पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि समयपूर्व रिहाई या अस्वीकृति से जुड़े सभी आदेश जेल विभाग की वैबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। इसके साथ ही निर्णय की सूचना संबंधित कैदी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी दी जाएगी।

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