Himachal: UGC के नए नियमों पर बवाल, शिमला में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी का अनाेखा प्रदर्शन…BJP कार्यालय घेरा

Khabron wala

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रहे विरोध की आंच अब हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तक पहुंच गई है। देवभूमि क्षत्रिय संगठन और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने इन नियमों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन करते हुए शिमला स्थित प्रदेश बीजेपी कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि इन विवादित नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

गले में रस्सी का फंदा, हाथों में हथकड़ी और शरीर पर लोहे की जंजीरें बांधकर किया प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान आक्रोश व्यक्त करने का तरीका बेहद अलग था। राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता गले में रस्सी का फंदा, हाथों में हथकड़ियां पहने और शरीर पर लोहे की जंजीरें बांधकर बीजेपी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि ये जंजीरें उन कथित प्रतिबंधों का प्रतीक हैं, जो यूजीसी के नए नियमों के जरिए सामान्य वर्ग के छात्रों पर थोपे जा रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार छात्रों को मानसिक रूप से जकड़ने का प्रयास कर रही है।

संविधान के उल्लंघन का लगाया आरोप
राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ सीधा भेदभाव हैं। उन्होंने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताया। रूमित ठाकुर ने आरोप लगाया कि इन नियमों के माध्यम से ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रही हैं, मानो बिना किसी अपराध के ही छात्रों को जेल भेजने की तैयारी की जा रही हो।

प्रदेश भाजपा सांसदों की चुप्पी पर उठाए सवाल
रूमित सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों की चुप्पी पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने जगत प्रकाश नड्डा, अनुराग ठाकुर और मंडी सांसद कंगना रनौत का नाम लेते हुए कहा कि सामान्य वर्ग के खिलाफ बनाए गए इन नियमों पर कोई भी सांसद खुलकर बोलने या विरोध करने को तैयार नहीं है। उन्होंने नेताओं पर सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

हिमाचल बंद की दी चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में संगठन ने केंद्र सरकार को अल्टीमेटम दिया है। पार्टी अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी के इन नए नियमों को जल्द वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मांगें न माने जाने की स्थिति में आने वाले समय में हिमाचल बंद का आह्वान किया जाएगा।

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