हिमाचल में अवैध कब्जे की डिमार्केशन करने गए पटवारी और कानूनगो पर जानलेवा हमला

Khabron wala 

देवभूमि कुल्लू की शांत वादियों में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब अवैध कब्जा हटवाने गई राजस्व विभाग की टीम को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। यह मामला महज एक विवाद नहीं, बल्कि ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारियों पर सरेआम किए गए हमले की एक गंभीर दास्तां है।

क्या है पूरा मामला?

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घटना कुल्लू के काईस क्षेत्र की राउगी पंचायत की है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अगस्त 2025 में प्रशासन को एक शिकायत मिली थी, जिसमें एक वर्तमान बीडीसी (BDC) सदस्य पर अवैध रूप से कब्जा करने का संगीन आरोप लगाया गया था। इसी शिकायत के आधार पर शुक्रवार को जमीन की निशानदेही (डिमार्केशन) करने के लिए पटवारी और कानूनगो की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी।

पटवारी भूप सिंह के अनुसार, टीम अपनी कार्रवाई कर ही रही थी कि अचानक बीडीसी सदस्य अपने रिश्तेदारों के साथ वहां धमक पड़ा। आरोप है कि बिना किसी संवाद के बीडीसी ने सबसे पहले कानूनगो के साथ हाथापाई शुरू कर दी।

इस बीच जब कानूनगो का चश्मा जमीन पर गिरा और पटवारी भूप सिंह उसे उठाने के लिए झुके, तो उन पर डंडों से जोरदार प्रहार किया गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन हमलावरों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में भी मारपीट जारी रखी।

जान बचाकर भागे अधिकारी, दस्तावेज भी गायब

पीड़ित पटवारी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि हमला इतना भीषण था कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागना पड़ा। इस अफरा-तफरी में राजस्व विभाग के महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी कहीं गुम हो गए हैं। घायल पटवारी ने यह भी खुलासा किया कि हमलावरों ने न केवल उन पर शारीरिक हमला किया, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को खत्म करने की धमकी भी दी है।

“हम सिर्फ अपना फर्ज निभाने गए थे, लेकिन हमें वहां मौत के साये में काम करना पड़ा। अब मुझे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है।” — भूप सिंह, पीड़ित पटवारी

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