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लाल किले पर किसानों ने फहराया झंडा, बोले- ‘हमारा काम हो गया’, जानें अब तक की 10 बड़ी बातें

दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर स्थिति चिंताजनक हो गई है. राजधानी में योजना के मुताबिक, रैली निकालने की जगह पर हजारों किसानों ने अलग रूट लिया, जिसके चलते किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई है और कई जगहों पर किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे गए हैं. हजारों की संख्या में ट्रैक्टर लेकर किसान लाल किला पहुंच गए, जहां पर किले के बाहर एक दूसरा झंडा फहराया गया. किसानों ने झंडा फहराने के बाद कहा कि उन्होंने अपना मैसेज दे दिया है.

ट्रैक्टर रैली के तहत तय किए गए अलग रूट से चलकर लाल किले पर हजारों किसान पहुंच गए थे. बड़ी संख्या में यहां पर ट्रैक्टर भी आए. रैली में बड़ी संख्या में किसान तिरंगा और किसान संगठनों के झंडे लेकर पहुंचे थे. लाल किले के सामने एक पोल पर किसानों में से एक ने चढ़कर सिखों का पवित्र झंडा फहराया.

यहां पर मौजूद किसानों में से एक ने NDTV से कहा कि ‘हम मोदी सरकार के सामने यह संदेश देने आए थे. हमारा काम हो गया. अब हम वापस जा रहे हैं.’ एक दूसरे किसान ने कहा, ‘उनके रोकने की कोशिशों के बावजूद हम लाल किले तक पहुंच गए. हम अपने लक्ष्य तक पहुंचे बिना नहीं रोकेंगे, जो है- कि इन कृषि कानूनों को वापस लिया जाए.’
किसानों को सिंघु और टिकरी बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली शुरू करनी थी, जहां हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी किसान और ट्रैक्टर मौजूद थे. लेकिन किसान यहां पर आउटर रिंग रोड पर प्रदर्शन करने की मांग कर रहे थे. पुलिस ने यहां बैरिकैडिंग की थी, जिसे तोड़कर किसान आगे बढ़ गए और रैली शुरू कर दी. टिकरी बॉर्डर पर भी ऐसा ही हुआ.

यह मुद्दा कोर्ट में भी उठा था, जिसके बाद किसानों को रैली करने की अनुमति मिली थी. किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान किया था, लेकिन सोमवार की शाम को प्रदर्शन में शामिल एक अन्य किसान संगठन- किसान मज़दूर संघर्ष समिति -ने कहा कि वो रूट के हिसाब से नहीं चलेगी.

किसानों की रैली गणतंत्र दिवस के परेड के बाद दिल्ली में घुसने वाली थी, लेकिन परेड शुरू होने से पहले ही दिल्ली की सीमाओं पर किसानों भीड़ इकट्ठा हो गई और किसान बैरिकैडिंग तोड़कर पैदल मार्च करने लगे.

किसानों की रैली गणतंत्र दिवस के परेड के बाद दिल्ली में घुसने वाली थी, लेकिन परेड शुरू होने से पहले ही दिल्ली की सीमाओं पर किसानों भीड़ इकट्ठा हो गई और किसान बैरिकैडिंग तोड़कर पैदल मार्च करने लगे.

रूट से अलग हटकर किसानों के कई समूह सेंट्रल दिल्ली में ITO पर पहुंच गए, जहां पर एक पुलिस बस को हाईजैक कर लिया गया. अक्षरधाम से आई एक क्लिप में देखा गया कि एक पुल पर चढ़कर पुलिस किसानों पर आंसू गैस के गोले दाग रही है.
किसान संगठनों के नेता आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की अपील करते हुए दिखे लेकिन प्रदर्शनकारी किसान एक बस के साथ तोड़फोड़ करते हुए दिखे. एहतियातन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कई मेट्रो लाइनों के स्टेशनों पर जरूरत के हिसाब से एंट्री और एग्ज़िट बंद कर रखा है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने बवाल खड़ा होने के बाद एक प्रेस स्टेंटमेंट जारी कर कहा है कि ‘जिन लोगों ने तय रास्ते से बाहर जाने का काम किया है उससे संयुक्त किसान मोर्चा ख़ुद को अलग करता है. आंदोलन में कुछ अराजक लोग घुस आए हैं. हम इस पूरे घटनाक्रम पर हम खेद व्यक्त करते हैं.’

वहीं किसान नेता योगेंद्र यादव ने भी एक ट्वीट कर कहा है कि ‘सभी साथियों से अपील है कि संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा निर्धारित रूट पर ही परेड करें. उससे अलग होने से आंदोलन को सिर्फ नुकसान ही होगा.
शांति ही किसान आन्दोलन की ताकत है. शांति टूटी तो सिर्फ आंदोलन को नुकसान होगा.’

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों से अपील की है कि वे कानून को हाथ में नहीं लें और शांति बनाए रखें. पुलिस ने किसानों से कहा कि वह पूर्व निर्धारित मार्ग पर ही ट्रैक्टर परेड निकालें. दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी अनिल मित्तल ने कहा, ‘हम प्रदर्शनकारी किसानों से अनुरोध करते हैं कि वे कानून हाथ में नहीं ले और शांति बनाए रखें.’

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