सेना में लेफ्टिनेंट बना गांव का बेटा, देशभर में किया टॉप- परिवार ने नाटी डालकर किया स्वागत

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के जुन्गा क्षेत्र से सटे पीरन गांव के लिए यह दिन इतिहास बन गया, जब गांव का बेटा रजत वर्मा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पहली बार अपने घर लौटा।

लेफ्टिनेंट बन गांव लौटा रजत

राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रविवार को रजत के गांव पहुंचते ही उत्सव जैसा माहौल बन गया। फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच ग्रामीणों ने अपने लाल का भव्य स्वागत किया। परिजनों व ग्रामीणों ने नाटी डालकर रजता का स्वागत किया

जैसे ही रजत वर्मा गांव की सरहद पर पहुंचे, पूरा पीरन गांव मानो एक परिवार में बदल गया। हर चेहरे पर खुशी और हर आंख में गर्व साफ झलक रहा था। लोगों ने रजत को फूलों की मालाएं पहनाईं और भारत माता की जय के नारों से वातावरण गूंज उठा।

भावुक हुए माता-पिता

इस भावुक क्षण के सबसे साक्षी बने रजत के माता-पिता। बेटे की उपलब्धि पर पिता खजान सिंह वर्मा और माता शकुंतला वर्मा खुद को रोक नहीं पाए। स्वागत के दौरान उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। गांव वालों के लिए यह केवल एक युवक की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का सम्मान था।

रजत वर्मा ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज सोलन से बीए (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने स्वयं अध्ययन कर सीडीएस परीक्षा की तैयारी की और अपने सपने को हकीकत में बदला।

रजत वर्मा ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डिग्री कॉलेज सोलन से बीए (अर्थशास्त्र) की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने स्वयं अध्ययन कर सीडीएस परीक्षा की तैयारी की और अपने सपने को हकीकत में बदला।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रजत

गांव के युवाओं का कहना है कि रजत की सफलता ने उन्हें भी बड़े सपने देखने और देश सेवा की राह चुनने की प्रेरणा दी है। रजत ने अपने स्वागत के दौरान कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों और गांव के हर व्यक्ति की दुआओं का परिणाम है।

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