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हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वार मैहतपुर पर लगने वाली टोल फीस को लेकर इलाका बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नंगल के पार्षदों और कई संस्थाओं ने मैहतपुर में धरना-प्रदर्शन किया। नंगल निवासियों का कहना है कि यह टोल उनके लिए अनुचित बोझ है, क्योंकि रोजमर्रा की आवाजाही के लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क अदा करना पड़ता है। नंगल और हिमाचल सीमा से सटे गांवों के लोगों का कहना है कि वे दैनिक आधार पर ऊना और अन्य कस्बों में व्यापार, कामकाज, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आते-जाते हैं। ऐसे में बार-बार टोल फीस देना उनकी जेब पर सीधा असर डालता है। स्थानीय संगठनों का तर्क है कि टोल का उद्देश्य मुख्यत: बाहरी वाहनों से राजस्व एकत्र करना होता है, जबकि सीमा से लगे इलाकों के लोगों को इससे छूट मिलनी चाहिए।
पहले भी दिया गया था सांकेतिक धरना
इससे पहले भी नंगल और आसपास के क्षेत्र के लोगों द्वारा सांकेतिक धरना दिया गया था, जहां तक नगर निकाय नंगल द्वारा इस एंट्री टैक्स के विरोध में हिमाचल के वाहनों से नंगल में टैक्स वसूलने का प्रस्ताव भी पारित कर पंजाब सरकार को भेज गया था। बावजूद इसके इनकी मांग पूरी न होने के चलते वीरवार को एक बार फिर इनका गुस्सा देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार टोल की आड़ में सीमा से जुड़े इलाकों के लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि नंगल वासी और आसपास के गांवों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऊना और हिमाचल के अन्य हिस्सों में जाते हैं, ऐसे में हर बार टोल फीस देना उनके लिए अनुचित है।
उचित निर्णय नहीं लिया तो तेज हाेगा संघर्ष
धरने में शामिल नंगल के पार्षदों दीपक नंदा और परमजीत पम्मा ने हिमाचल सरकार को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नंगल और आसपास के क्षेत्रों को टोल से मुक्त करने का निर्णय नहीं लिया गया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़े स्तर पर किया जाएगा और सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
कोर्ट में जनहित याचिका की है दायर
अधिवक्ता निशांत गुप्ता ने कहा कि इस मामले को लेकर पहले ही कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है और अब वह भी कस्बा नंगल और आसपास के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले को लेकर एक और पीआईएल दायर करने जा रहे हैं। नैशनल हाईवे पर इस प्रकार के टोल बैरियर अवैध हैं। उन्होंने हिमाचल सरकार द्वारा इंपोज किए गए टोल टैक्स को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल हाईकोर्ट में इस मामले की लड़ाई लड़ी जा रही है लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने से गुरेज नहीं किया जाएगा।