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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार और कर्तव्यों में लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। उपायुक्त (डीसी) सिरमौर प्रियंका वर्मा ने शिलाई विकास खंड के तहत आने वाली ग्राम पंचायत जरवा-जुनैली की महिला प्रधान आशा देवी को तत्काल प्रभाव से उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक प्रधान आशा देवी को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अवचार का दोषी पाया गया है। जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने के बाद डीसी प्रियंका वर्मा ने यह सख्त कदम उठाया है।
6 साल के लिए अयोग्य घोषित
सिर्फ पद से हटाना ही नहीं, बल्कि प्रशासन ने आशा देवी पर भविष्य के लिए भी प्रतिबंध लगा दिया है। आदेशों के अनुसार उन्हें पद से हटाए जाने की तारीख से अगले 6 वर्षों की अवधि के लिए पंचायत के किसी भी पदाधिकारी के रूप में निर्वाचित होने के लिए अयोग्य (निरर्हित) घोषित किया गया है। इसका अर्थ है कि वह अगले 6 साल तक पंचायत का कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। बर्खास्तगी के साथ-साथ डीसी ने प्रधान द्वारा दुरुपयोग की गई सरकारी राशि की वसूली के भी आदेश जारी किए हैं। आशा देवी को निर्देश दिए गए हैं कि वह 12,99,607 रुपए की धनराशि तुरंत पंचायत निधि खाते में जमा करवाएं।
रिकॉर्ड और मोहर सौंपने का निर्देश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आशा देवी के पास यदि ग्राम पंचायत जरवा-जुनैली की कोई नकद राशि, पंचायत का रिकॉर्ड (अभिलेख), प्रधान पद की मोहर या अन्य कोई स्टोर/स्टॉक का सामान है तो उसे तुरंत प्रभाव से पंचायत सचिव को सौंपना सुनिश्चित करें। डीसी सिरमौर प्रियंका वर्मा ने इन आदेशों की पुष्टि करते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई अमल में लाई
गई है।









