पांवटा साहिब की सीमा के विकासनगर के एसडीओ के खिलाफ दर्ज FIR निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक मामले पर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई, जानिए क्या हुआ?
विकासनगर के एसडीओ वन के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबधित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि अगले सोमवार तक स्थिति से अवगत कराएं. साथ में कोर्ट ने ये भी कहा है कि जिस जगह यह घटना हुई, क्या वो जगह खनन प्रतिबंधित क्षेत्र था या नहीं? इस पर राज्य सरकार आने वाले सोमवार तक स्थिति से अवगत कराएं.
कोर्ट को दिखाए घटना के वीडियो
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय को बताया गया कि घटना के समय राकेश उत्तराखंडी और शिकायतकर्ता मनीष चौहान के वाहन भी मौके पर मौजूद थे. अदालत को घटना से संबंधित कुछ वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें कथित तौर पर वन अधिकारी को वाहन से बाहर निकालकर मारपीट करते हुए देखा जा सकता है.
फिलहाल न्यायालय ने मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है. अब इस मामले में अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी, जिसमें राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश करेगी.
कोर्ट की कार्यवाही से जुड़े वीडियो पर भी सख्त रुख:इसके अलावा कोर्ट ने सोशल मीडिया पर कोर्ट की प्रोसिडिंग की हो रही वायरल वीडियोज का भी संज्ञान लिया है. कोर्ट ने कहा कि यह सुविधा सरल व आमजन तक न्याय पहुंचाने के लिए दी गई थी, लेकिन कुछ लोग इसका लगातार फायदा उठाकर न्याय पालिका की गरिमा को प्रभावित करना चाह रहे हैं, जो लाइव स्ट्रीमिंग एक्ट 2018 की नियमवाली के विरुद्ध है. जिसके सभी कॉपी राइट्स उच्च न्यायालय के अधीन है. कोर्ट कभी भी संज्ञान लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.
देहरादून के विकासनगर में फरवरी महीने के आखिर में वन अधिकारियों से मारपीट हुई थी. जिसका वीडियो भी सामने आया था. प्रकरण में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच की. इस मामले में कालसी के उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) राजीव नयन नौटियाल ने विकासनगर पुलिस को बताया कि 27 फरवरी की शाम जब वो अपने कार्यालय से लौट रहे थे तो यमुना नदी की ओर जा रहे एक डंपर की गतिविधि संदिग्ध प्रतीत हुई, जिसका उन्होंने वीडियो बना लिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और हाथापाई करते हुए शासकीय कार्य में व्यवधान डाला. पुलिस ने शिकायत के आधार पर 27 फरवरी को मामला पंजीकृत किया. अधिवक्ताओं की ओर से न्यायालय को बताया गया कि घटना के समय राकेश उत्तराखंडी और शिकायतकर्ता मनीष चौहान के वाहनों को देखा गया. न्यायमूर्ति को वो वीडियो भी दिखाए गए, जिसमें सरेआम वन अधिकारी को गाड़ी से निकालकर पीटा गया.









