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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भाजपा विधायक हंसराज पर पोक्सो एक्ट में दर्ज मामले से जुड़ी याचिका के मामले में नया मोड़ आ गया है. याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने खुद को इस मामले से अलग करने का फैसला लिया है. न्यायमूर्ति ने निष्पक्ष न्याय और न्यायिक गरिमा बनाए रखने का हवाला दिया गया है. बताया गया कि प्रतिवादी हंसराज का पक्ष रख रहे अधिवक्ता न्यायाधीश के रिश्तेदार हैं. ऐसे में उनका इस मामले को सुनना उचित नहीं है. न्यायाधीश ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजते हुए मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने का आग्रह किया है.
भाजपा विधायक की ज़मानत को HC में मिली है चुनौती
चुराह विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हंसराज पर पॉक्सो में मामला दर्ज है. विधायक को इस मामले में सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी. इस पर विधायक की जमानत को पीड़िता ने याचिका दायर कर हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दी है. मामला हिमाचल हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायाधीश के पास सूचीबद्ध था. जिस पर अब न्यायमूर्ति ने मामले से खुद को अलग करने का फैसला किया है. न्यायाधीश का कहना है कि मामले में प्रतिवादी विधायक हंसराज के पक्षकार अधिवक्ता न्यायाधीश के रिश्तेदार होने के कारण उनका इस मामले को सुनना उचित नहीं है.
न्यायाधीश ने अपने लिखित आदेशों में कहा ‘रिकॉर्ड देखने से स्पष्ट होता है कि याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 (विधायक हंसराज) का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता प्रमोद सिंह ठाकुर कर रहे है. चूंकि वो मुझसे संबंधित हैं, इसलिए मेरे लिए इस मामले की सुनवाई करना उचित नहीं होगा. अतः इस मामले को माननीय मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए.’
पिछले साल दर्ज हुआ था पोक्सो का मामला
बता दें कि हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में भाजपा विधायक हंसराज पर पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज है. इस मामले में हंसराज को स्पेशल पोक्सो कोर्ट चंबा ने बीते साल 27 नवंबर को जमानत दे दी थी. इसके बाद पीड़िता की याचिका पर मामला हिमाचल हाई कोर्ट पहुंचा है. याचिका में पीड़िता ने विधायक की जमानत को चुनौती दी है. इस मामले में स्टेट और आरोपी विधायक हंसराज के साथ-साथ SP जिला चंबा, SHO महिला पुलिस स्टेशन चंबा को प्रतिवादी बनाया गया है.










