पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद आइपीएस अधिकारी आइजी जहूर हैदर जैदी ने मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे प्रदेश पुलिस मुख्यालय शिमला में दोबारा ज्वाइनिंग दी। फिलहाल उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। जैदी को कोटखाई में छात्रा दुष्कर्म एवं हत्या मामले में पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा किया गया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी सेवा में वापसी का रास्ता साफ हुआ। हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर अंतिम फैसला होने तक उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने भी अदालत के आदेश के आधार पर उनकी सेवा में बहाली के निर्देश जारी किए।
हाई कोर्ट ने आदेश में यह भी टिप्पणी की थी कि जैदी पांच साल से अधिक समय तक जेल में रह चुके हैं और अदालत में अपीलों की लंबी कतार को देखते हुए मामले के जल्द निपटारे की संभावना कम है। इसी आधार पर अदालत ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। फिलहाल जैदी की ज्वाइनिंग के बाद पुलिस महकमे में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वर्ष 2017 में कोटखाई में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म व हत्या का मामला सामने आया था। जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपित सूरज की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। मामले की जांच बाद में सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआइ जांच में पुलिसकर्मियों पर हिरासत में हत्या के आरोप तय हुए। जनवरी 2024 में चंडीगढ़ स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत ने जैदी समेत आठ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि इस मामले में शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को अदालत ने सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। कोर्ट ने जनवरी में जैदी को राहत दी थी।









