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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला पुलिस ने अपना कड़ा रुख अपना लिया है। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद शिमला पुलिस पूरी तत्परता दिखाते हुए अपराधों पर लगाम कस रही है। हाल ही में पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) का इस्तेमाल करते हुए दंगा-फसाद और लापरवाही से वाहन चलाने वाले आरोपियों पर नकेल कसी है और उन्हें सख्त शर्तों के साथ पाबंद किया है।
पहला मामला पुलिस थाना कोटखाई का है। 15 मार्च को दर्ज इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में लिया। आरोपियों की पहचान 18 वर्षीय कर्मा पुत्र बबलू कुमार, निवासी रामपुर, जिला शिमला और 18 वर्षीय नयन पुत्र देशराज, निवासी बिलासपुर के रूप में हुई है। इन दोनों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 127(2), 115(2), 190, 191(2), 332(सी) और 351(2) के तहत दंगा करने और आपसी झगड़ा-फसाद करने का गंभीर आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस थमाया है और भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए सख्त शर्तों के साथ पाबंद किया है।
दूसरा मामला पुलिस थाना कुपवी का है, जहां लापरवाही से वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले एक आरोपी पर पुलिस ने डंडा चलाया है। 10 मार्च को दर्ज मामले के अनुसार तहसील कुपवी निवासी 31 वर्षीय हरि लाल पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 125(ए) और 281 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भी आरोपी हरि लाल को BNSS की धारा 35(3) के अंतर्गत नोटिस जारी कर भविष्य के लिए पाबंद करते हुए, कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा किया है।
शांति भंग करने वालों की खैर नहीं : गौरव सिंह
शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने इस कार्रवाई पर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि शिमला पुलिस जिले में कानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि समाज की शांति भंग करने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन कर आम लोगों की जान जोखिम में डालने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में भी ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ इसी प्रकार की कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।











