Khabron wala
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच को बढ़ावा देते हुए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ के दायरे को बढ़ा दिया है। अब विधवा महिलाओं की बेटियों को न केवल प्रदेश के भीतर, बल्कि राज्य से बाहर भी उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना का मुख्य लक्ष्य विधवा, निराश्रित, तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण सुनिश्चित करना है।
27 वर्ष की आयु तक मिलेगा लाभ
सरकार द्वारा किए गए नए संशोधनों के अनुसार, पात्र विधवाओं की बेटियां अब 27 वर्ष की आयु तक इस योजना का लाभ उठा सकेंगी। राज्य से बाहर सरकारी संस्थानों में इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ या मैनेजमेंट जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रही छात्राओं को, सरकारी हॉस्टल न मिलने की स्थिति में, 3,000 रुपये प्रति माह की सहायता (अधिकतम 10 महीनों के लिए) पीजी या किराए के कमरे के लिए दी जाएगी।
बजट और लाभार्थियों का विवरण
राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए योजना के तहत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से 3 फरवरी 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में 18 से 27 वर्ष की 504 छात्राएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं। योजना के विस्तार से इस संख्या में भारी वृद्धि की उम्मीद है, जिसके लिए सरकार ने एक करोड़ रुपये के अतिरिक्त वार्षिक बजट का अनुमान लगाया है।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विस्तार का उद्देश्य बेटियों को आर्थिक बाधाओं से मुक्त कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकें।









