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Shimla: पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और कर्त्तव्य

Khabron wala 

पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है। प्रदेश पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को अपने जारी एक संदेश में यह बात कही है। उन्होंने कहा है कि यदि हिमाचल प्रदेश पुलिस को एक सशक्त, एकजुट, अनुशासित और आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बल के रूप में विकसित होना है तो कुछ मूलभूत सिद्धांत ऐसे हैं, जो प्रत्येक सदस्य-प्रत्येक कर्मी से लेकर आईपीएस अधिकारी तक के लिए पूर्णत: अनिवार्य और गैर-पराक्रम्य हैं। डीजीपी ने कहा है कि सबसे पहले कार्य पर पूर्ण एकाग्रता हमारी प्राथमिक पहचान होनी चाहिए।

गपशप, अनावश्यक चर्चाएं, अफवाहें या समय की बर्बादी न केवल व्यक्तिगत दक्षता को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरी संस्था की कार्यक्षमता को कमजोर करती हैं। हमें अपने हर क्षण को जनता की सेवा के लिए समर्पित करना होगा। इसी तरह ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण एक मजबूत पुलिस बल की आधारशिला हैं। हमारी वफादारी वर्दी, संगठन और हिमाचल प्रदेश की जनता के प्रति होनी चाहिए। आधे मन से किया गया कार्य, लापरवाह दृष्टिकोण या चयनात्मक जिम्मेदारी हमारी संस्थागत शक्ति को कमजोर करती है। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को प्रतिदिन अपने कर्त्तव्य के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता दिखानी होगी। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का समय पर पालन और स्पष्ट फीडबैक देना जवाबदेही की मूल शर्त है।

वरिष्ठों के निर्देश केवल औपचारिकता नहीं हैं बल्कि उनका उद्देश्य कार्यान्वयन है। समय पर अनुपालन, ईमानदार रिपोर्टिंग और रचनात्मक प्रतिक्रिया ही संगठन को गतिशील और प्रभावी बनाए रखती है। डीजीपी ने कहा है कि निर्देशों पर चुप्पी, देरी या टालमटोल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अनुशासन और समय पालन हमारे आंतरिक चरित्र का प्रतिबिंब हैं। अनुशासित बल सम्मान अर्जित करता है तथा अनुशासनहीनता विश्वास को कमजोर करती है। समय पर उपस्थित होना, गरिमा बनाए रखना और कमांड चैन का कड़ाई से पालन करना विकल्प नहीं, बल्कि हमारी मूल जिम्मेदारी है।

जनता को गर्व के साथ अटूट विश्वास होगा

डीजीपी ने कहा है कि यह सदैव याद रखना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की वास्तविक शक्ति केवल पद या संख्या में नहीं, बल्कि सामूहिक चरित्र, पेशेवर उत्कृष्टता और टीम भावना में निहित है। यदि इन सिद्धांतों को जीवन का हिस्सा बना लें, तो हम न केवल अपनी कार्यक्षमता बढ़ाएंगे, बल्कि एक ऐसा पुलिस बल निर्मित करेंगे, जिस पर जनता को गर्व और अटूट विश्वास होगा।

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