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शिमला की वादियों में इतिहास की एक अनमोल निशानी हमेशा के लिए मौन हो गई। हिमाचल की ऐतिहासिक विरासत को एक गहरा जख्म लगा है, जहाँ क्योंथल रियासत की शान माना जाने वाला जुन्गा स्थित पुश्तैनी महल भीषण आग की लपटों में विलीन हो गया। जो महल कभी राजाओं की चहल-पहल और राजसी ठाट-बाट का केंद्र था, वह अब सिर्फ राख का ढेर बनकर रह गया है।
घटना का विवरण
राजधानी शिमला के समीप जुन्गा में स्थित यह भव्य महल अचानक आग की चपेट में आ गया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी इमारत को अपनी जद में ले लिया। हालांकि इस दुर्घटना के पीछे के सटीक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन इस घटना ने सदियों पुराने स्थापत्य को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
यह केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध संस्कृति का एक जीवित दस्तावेज था। इसकी प्रमुख विशेषताएं कुछ इस प्रकार थीं:
क्योंथल राजवंश का घर: यह महल ऐतिहासिक रूप से क्योंथल रियासत के शासकों का निवास स्थान रहा है, जिसका क्षेत्र के इतिहास में गहरा महत्व है।
काष्ठकुणी वास्तुकला: यह भवन अपनी पारंपरिक पहाड़ी निर्माण शैली और लकड़ी पर की गई बारीक व दुर्लभ नक्काशी के लिए प्रसिद्ध था।
दो शताब्दियों का सफर: लगभग 200 वर्षों से खड़ा यह महल कई ऐतिहासिक बदलावों का गवाह रहा था।










