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सिरमौर में रिश्वतखोर शिक्षक पर गिरी गाज, विभाग ने जबरन थमाया घर बैठने का आदेश

Khabron wala 

हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को साफ.सुथरा और पारदर्शी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। रिश्वतखोरी के आरोपों में घिरे एक शिक्षक पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए विभाग ने उसे जबरन घर बैठा दिया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन स्कूलों में शिक्षक बच्चों को ईमानदारी, नैतिकता और आदर्शों का पाठ पढ़ाते हैं, वहां भ्रष्टाचार में लिप्त शिक्षकों के लिए कोई स्थान नहीं है। विभाग की इस बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी मिल गई है।

शिक्षक ने मांगी थी रिश्वत

दरअसल यह कार्रवाई जिला सिरमौर के नागेटा स्थित सरकारी स्कूल में तैनात शिक्षक के खिलाफ की गई, जिससे शिक्षा विभाग में स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरा मामला वर्ष 2021 में सामने आया था, जब संबंधित गणित प्रवक्ता हरदीश कुमार तरुवाला स्कूल में आईसीटी लैब के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। आरोप लगा कि उन्होंने लैब उपकरण सप्लाई करने वाले वेंडर से फोन पर रिश्वत की मांग की।

शिक्षक की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। शिकायत को गंभीर मानते हुए विभाग ने तत्काल जांच शुरू करवाई और नाहन पुलिस थाने में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। शिक्षा विभाग ने केंद्रीय सेवा नियमों के तहत विस्तृत विभागीय जांच बैठाई। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों और शिक्षक की स्वीकारोक्ति के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए।

शिक्षक को जबरन किया सेवानिवृत्त

शिक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, लेकिन उनका जवाब विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद विभाग ने साफ माना कि ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना शिक्षा व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ होगा। ऐसे में शिक्षा विभाग ने आरोपी पाए गए शिक्षक को सरकारी सेवा से अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया गया। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए हैं।

शिक्षा विभाग के आदेश में स्पष्ट कहा गया कि शिक्षक केवल कर्मचारी नहीं बल्कि समाज के नैतिक मार्गदर्शक होते हैं। यदि शिक्षक ही रिश्वतखोरी में लिप्त पाए जाएं तो यह छात्रों और समाज दोनों के विश्वास को ठेस पहुंचाता है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जो स्वयं भ्रष्टाचार में शामिल हो, वह विद्यार्थियों को ईमानदारी और नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकता। इसी आधार पर कड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षक को जबरन सेवा से अलग कर दिया गया।

स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी आदेशों के साथ ही विभाग ने संकेत दे दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। इस कार्रवाई को राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ा कदम माना जा रहा है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े संस्थानों में ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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