डॉ.वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन की स्टाफ नर्स के कोरोना पोजिटिव पाए जाने पर एनपीएस महासंघ ने कॉलेज के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप जड़ा है। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब 22 अगस्त को मेडिकल कॉलेज में ऑर्थो वार्ड में जहां पर वह स्टाफ नर्स तैनात थी। जिसने उक्त कोरोना पोजिटिव का उपचार भी किया था। जब उसके बारे में विभाग को पता चल चुका था कि वह व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। तो क्यों सभी सरकारी दिशानिर्देशों और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस को या समय-समय पर सरकार के जारी निर्देशों को नजरअंदाज करके एमएस और प्रधानाचार्य ने उक्त स्टाफ नर्स को होम आइसोलेशन में क्यों नहीं भेजा। उनकी जिंदगी को क्यों खतरे में डाला।
एनपीएस के राज्य अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर, राज्य महासचिव भरत शर्मा तथा जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र पुन्डीर ने कहा कि कैसे मेडिकल कॉलेज ने इतनी भारी चूक की की, एक अपने ही स्टाफ को कोरोना उपहार में दे दिया। जहां मेडिकल स्टाफ पर बाकी लोगों की जिंदगी निर्भर कर रही हैं। वही अपने स्टाफ में ही अधिकारियों द्वारा ऐसी लापरवाही के लिए सरकार और विभाग को उन पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। एक तो सरकारी कर्मचारी दिन रात एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ हर जगह सरकारी दिशा निर्देशों का पालन कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के अधिकारी अपने ही स्टाफ की जान जोखिम में डाल रहे है।
महासंघ ने कॉलेज प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अगर उक्त कर्मचारी के साथ कुछ भी अनहोनी घटना घटित होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। महासंघ ने कहा की एक तो सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सरकार ने बंद कर रखी है। ऊपर से मृत्यु के उपरांत केंद्र लाभ की अधिसूचना जिसे कि केंद्र ने 2009 में लागू किया था उसे भी लागू नहीं कर रही ऐसे में कैसे कोई सरकारी कर्मचारी अपने आप को सुरक्षित महसूस करें।