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आरएलए सोलन में उत्तर प्रदेश के तीन ट्रालों के पंजीकरण में हुए फर्जीवाड़े की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि शातिरों ने आरएलए के एक कर्मचारी के साथ मिलीभगत कर वाहन पोर्टल पर दो फर्जी आईडी बनाईं और इस घोटाले को अंजाम दिया। यह फर्जीवाड़ा केवल तीन ट्रालों तक सीमित नहीं है, बल्कि आशंका है कि पिछले तीन महीनों में इसी तरह कई अन्य वाहनों का भी फर्जी पंजीकरण किया गया है।
29 अक्तूबर काे तैयार की थीं 2 फर्जी आईडी
इस मामले में आरएलए सोलन के एक कर्मचारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में पाया गया कि वाहन पोर्टल के यूजर एडमिन सैक्शन में, जहां नियमानुसार आरएलए कम एसडीएम का फोन नंबर होना चाहिए था, वहां उक्त कर्मचारी का नंबर दर्ज मिला। शातिरों ने 29 अक्तूबर, 2025 को दो फर्जी आईडी तैयार की थीं, जिसमें एक आईडी कर्मचारी के नाम पर और दूसरी आरएलए कम एसडीएम के नाम पर बनाई गई थी।
बिलासपुर एमवीआई की सतर्कता से खुला राज
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब फर्जी तरीके से सोलन में पंजीकृत तीन ट्रालों को बिलासपुर जिले के आरएलए झंडूता ट्रांसफर कर दिया गया। वहां औपचारिकताएं पूरी कर जब परमिट के लिए आवेदन किया गया, तो बिलासपुर के एमवीआई ने सत्यापन के लिए सोलन एमवीआई को फोन किया। उन्होंने पूछा कि क्या इन ट्रालों की फिजिकल वैरिफिकेशन हुई है? सोलन एमवीआई ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आया।
फाइलें मांगने पर कर्मचारी ने की टालमटोल
मामला संज्ञान में आते ही एसडीएम सोलन डॉ. पूनम बंसल ने संबंधित कर्मचारी से उन तीनों ट्रालों की फाइलें तलब कीं। कर्मचारी ने पहले टालमटोल की, लेकिन एसडीएम की सख्ती के बाद उसने खुलासा किया कि ये पंजीकरण विभागीय पोर्टल से नहीं, बल्कि किसी ने फर्जी आईडी बनाकर बाहर से किए हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोपी कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
पुलिस जांच तेज, खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
एसपी सोलन गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शुक्रवार को इस केस से जुड़ा अतिरिक्त रिकॉर्ड मांगा था, जिसे आरएलए कार्यालय द्वारा तैयार कर पुलिस को सौंप दिया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी आईडी के जरिए और कितने वाहनों का पंजीकरण किया गया है।












