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जिला पुलिस सोलन ने क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA) में वाहन पंजीकरण से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर और दस्तावेजी धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस संगठित अपराध में सरकारी पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर अवैध रूप से वाहनों के डेटा में बदलाव किया जा रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए दो सरकारी लिपिकों (क्लर्क) और चार बिचौलियों (एजेंटों) को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इस मामले के तार हिमाचल के पांच जिलों सोलन, बिलासपुर, मंडी, ऊना और कांगड़ा से जुड़े हुए हैं।
अधिकारी की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस मामले की शुरुआत 26 जनवरी को हुई, जब आरएंडएलए सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने पुलिस अधीक्षक को अपनी शिकायत सौंपी। जांच में पता चला कि ‘वाहन पोर्टल’ के साथ अवैध रूप से छेड़छाड़ की गई थी। कई वाणिज्यिक वाहनों के लोडेड वेट (भार क्षमता) में बदलाव, स्वामित्व हस्तांतरण और पंजीकरण में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर धांधली की गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आधिकारिक सरकारी नेटवर्क के बाहर के आईपी एड्रेस का उपयोग कर पोर्टल लॉग-इन किया। पंजीकरण लिपिक जितेंद्र ठाकुर के माध्यम से कई यूजर आईडी और मोबाइल नंबरों का दुरुपयोग किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ‘जितेंद्र’ और ‘डॉ. पूनम’ के नाम से फर्जी यूजर आईडी तैयार की गई थीं, जिनका उपयोग बिना किसी मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) की जांच के वाहनों के सत्यापन और अनुमोदन के लिए किया गया।
झंडूता का क्लर्क निकला मास्टरमाइंड
एसपी सोलन टी. साई दत्तात्रेय वर्मा द्वारा गठित एसआईटी (SIT) ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पाया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार आरएलए झंडूता में कार्यरत क्लर्क गौरव भारद्वाज है। गौरव ने राजकुमार उर्फ सन्नी, विकास सिंह उर्फ शालू, जितेंद्र और अनिल जैसे एजेंटों का एक सिंडिकेट बना रखा था। ये लोग वाहन मालिकों से मोटी रकम वसूल कर दस्तावेजों में हेरफेर करते थे।
करोड़ों का वित्तीय लेन-देन
वित्तीय जांच के दौरान मुख्य आरोपी गौरव भारद्वाज के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस इसे एक सुनियोजित आर्थिक अपराध और आपराधिक षड्यंत्र मान रही है। पुलिस थाना सदर की टीम ने 3 अप्रैल को त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में शामिल 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार विभाग के अन्य किन अधिकारियों या बाहरी राज्यों से जुड़े हैं।












