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हिमाचल प्रदेश सरकार ने IGMC शिमला में तैनात पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर डॉ. राघव निरूला की सेवाओं को बहाल कर दिया है। सरकार ने उनके खिलाफ लिया गया टर्मिनेशन का फैसला वापस ले लिया है।
डॉ. राघव की सेवाएं बहाल
यह निर्णय मरीज और डॉक्टर के बीच आपसी समझौते के बाद लिया गया है, जिसके तहत मरीज ने अपनी शिकायत भी वापस ले ली थी। सरकार का मानना है कि आपसी समझौते और शिकायत वापसी के बाद कड़ी कार्रवाई को जारी रखना उचित नहीं होगा।
दरअसल, बीते 22 दिसंबर को IGMC शिमला में इलाज के दौरान डॉक्टर और मरीज के बीच विवाद हो गया था। इस घटना के दो दिन बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए डॉ. राघव निरूला की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। सरकार ने इस मामले में जांच भी बिठाई थी और शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई थी।
मारपीट की वीडियो हुई वायरल
यह मामला तब तूल पकड़ गया, जब आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर द्वारा मरीज से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ तौर पर देखा गया कि डॉ. राघव निरूला मरीज अर्जुन (36 वर्ष) के चेहरे पर कई बार हाथ से वार करते नजर आ रहे हैं।
जवाब में मरीज ने भी पैर से पलटवार किया। वहां मौजूद मरीज के परिजनों ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया।
वीडियो सामने आने के बाद प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए और डॉक्टर को निलंबित करते हुए बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
डॉक्टरों की हड़ताल से बढ़ी मुश्किलें
डॉ. निरूला के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में डॉक्टरों में रोष फैल गया। विभिन्न सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई जगह ओपीडी और नियमित सेवाएं ठप हो गईं।
हालात बिगड़ते देख मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मामले में सख्ती दिखाई और डॉक्टरों से बातचीत कर उन्हें काम पर लौटने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की दखल के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया और स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं।
मरीज और डॉक्टर में हुआ समझौता
इसी बीच मरीज अर्जुन और डॉ. राघव निरूला के बीच आपसी सुलह हो गई। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद को खत्म करने का निर्णय लिया, जिसके बाद मरीज ने अपनी शिकायत भी वापस ले ली। इस समझौते को सरकार ने संज्ञान में लिया और पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की गई।
मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हिमाचल सरकार ने डॉ. राघव निरूला की टर्मिनेशन को रद्द करते हुए उन्हें बहाल करने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि आपसी समझौते और शिकायत वापसी के बाद कड़ी कार्रवाई को जारी रखना उचित नहीं होगा।
अनुशासन को किया जाएगा मजबूत
डॉ. निरूला की बहाली के फैसले के बाद एक ओर जहां डॉक्टर वर्ग ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर संवाद और संयम की जरूरत को उजागर करता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों में व्यवस्था और अनुशासन को और मजबूत किया जाएगा।
मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हिमाचल सरकार ने डॉ. राघव निरूला की टर्मिनेशन को रद्द करते हुए उन्हें बहाल करने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि आपसी समझौते और शिकायत वापसी के बाद कड़ी कार्रवाई को जारी रखना उचित नहीं होगा।
अनुशासन को किया जाएगा मजबूत
डॉ. निरूला की बहाली के फैसले के बाद एक ओर जहां डॉक्टर वर्ग ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर अस्पतालों में मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर संवाद और संयम की जरूरत को उजागर करता है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों में व्यवस्था और अनुशासन को और मजबूत किया जाएगा।











