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हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा बाहरी राज्यों के आईएएस अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान पर अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की प्रतिक्रिया सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए बेहद संतुलित लेकिन साफ शब्दों में अपनी बात रखी और पूरे विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की। सीएम सुक्खू ने इशारों.इशारों में पीडब्ल्यूडी मंत्री को भी नसीहत दे दी कि प्रशासन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति किसी भी सूरत में ठीक नहीं है।
देश के हर कोने में समान भाव से सेवा देते हैं अधिकारी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि भारत एक राष्ट्र है और पूरा देश हम सबका अपना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी को उसके राज्य या पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
आईएएस जैसी सेवाएं ऑल इंडिया सर्विस हैं और उनका उद्देश्य देश के हर कोने में समान भाव से सेवा देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के अधिकारी भी देश के अन्य राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं और वहां भी उनसे यही अपेक्षा रहती है कि वे पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से काम करें।
सरकार और प्रशासन एक-दूसरे के पूरक
सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार और प्रशासन एक-दूसरे के पूरक हैं। अधिकारियों और मंत्रियों के बीच बेहतर समन्वय से ही जनता के काम पूरे होते हैं। सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर इस तरह की बयानबाजी से गलत संदेश जाता है और इसका असर पूरे सिस्टम पर पड़ता है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि मतभेद अगर हों भी तो उन्हें आपसी संवाद और उचित मंच पर सुलझाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान को लेकर सरकार के भीतर ही असहमति खुलकर सामने आ चुकी है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और अब IAS-IPS एसोसिएशन की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक के साथ-साथ प्रशासनिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।
डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा CM का बयान
सीएम सुक्खू के बयान को एक तरह से डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार किसी भी तरह की क्षेत्रीय सोच या अफसरों के मनोबल को ठेस पहुंचाने वाले बयानों के पक्ष में नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी जता दिया कि प्रदेश हित में सरकार और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा, न कि आमने-सामने खड़ा होना।










