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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के अंदर सुक्खू सरकार के मंत्रियों की आपसी बयानबाजी ने माहौल को काफी गरमा दिया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के तल्ख बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। मंत्री अनिरुद्ध सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान के बाद जिस तरह आईपीएस अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने आई, उस पर विक्रमादित्य सिंह की नई टिप्पणी ने सियासी हलकों में एक बार फिर उबाल ला दिया है।
मुझे किसी सुरक्षा की जरूरत नहीं
विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा कि वह उम्र में भले ही छोटे हों, लेकिन जनता के मुद्दों पर चुप रहने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी से टकराव की राजनीति नहीं करना चाहते, लेकिन हिमाचल प्रदेश के हितों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेंगे। उनके मुताबिक लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की पहली और आखिरी जिम्मेदारी जनता के प्रति होती है, न कि किसी पद या संस्था के दबाव में काम करना। उन्होंने आईपीएस अधिकारियों के बयान पर भी दो टूक कहा कि मुझे किसी सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान के बाद आईपीएस अधिकारियों के रुख और मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट मांगने के घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने दो टूक कहा कि किसी भी सार्वजनिक सेवक को खुद को शासक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासन जनता की सेवा के लिए है और अगर कहीं जनता के हित प्रभावित होते हैं, तो चुने हुए प्रतिनिधियों का फर्ज बनता है कि वे सवाल उठाएं।
मुझे नहीं चाहिए अतिरिक्त सुरक्षा
विक्रमादित्य सिंह ने यह भी साफ किया कि उनके मन में आईपीएस एसोसिएशन और अधिकारियों के लिए पूरा सम्मान है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोगों को किसी अतिरिक्त सुरक्षा या विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें जनता का भरोसा, प्यार और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अगर कोई सुरक्षा वापस लेनी है, तो वे उसके लिए भी तैयार हैं।
सरकार के भीतर मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी विक्रमादित्य सिंह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन वह अपने सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, राजनीति में व्यक्ति की पहचान उसके मूल्यों से बनती है, न कि पद और शक्ति से।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विक्रमादित्य सिंह के लगातार आक्रामक होते बयान सुक्खू सरकार के भीतर असहज स्थिति को दर्शा रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार को स्थिर और एकजुट दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों के सार्वजनिक बयान विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी विक्रमादित्य सिंह यह कह चुके हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो वह नाम उजागर करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में उनके हालिया बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में हिमाचल की राजनीति में सत्ता और प्रशासन के रिश्तों को लेकर बहस और तेज हो सकती है।









