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हिमाचल प्रदेश को नया राज्यपाल मिल गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार देर रात जारी आदेश में लद्दाख के उप-राज्यपाल रहे कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। इसके साथ ही राज्य में करीब तीन साल बाद राज्यपाल का चेहरा बदलने जा रहा है। मौजूदा राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अब तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से किए गए इस फैसले के तहत हिमाचल और लद्दाख समेत देश के कुल नौ राज्यों में राज्यपालों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है।
हिमाचल के नए राज्यपाल बनाए गए 66 वर्षीय कविंद्र गुप्ता जम्मू शहर के जानीपुर इलाके के निवासी हैं और उनका लम्बा राजनीतिक व सार्वजनिक जीवन रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सामाजिक संगठनों के साथ काम करते हुए की थी और विश्व हिंदू परिषद में सेक्रेटरी के तौर पर भी काम किया। जानकारी अनुसार उन्होंने महज 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया था। आपातकाल के दौरान वे करीब 13 महीने तक जेल में भी रहे थे।कविंद्र गुप्ता जम्मू की स्थानीय राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे और तीन बार जम्मू शहर के महापौर चुने गए। वर्ष 2005 से 2010 के बीच वे लगातार तीन बार इस पद पर रहे। इसके अलावा वे भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के महासचिव भी रहे और 1993 से 1998 तक दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गांधी नगर सीट से पहली बार विधायक के रूप में जीत हासिल की और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का स्पीकर चुना गया।
उनके राजनीतिक जीवन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब वे 30 अप्रैल 2018 से 19 जून 2018 तक जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री भी रहे। इसके बाद जुलाई 2025 में उन्हें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया और उन्होंने 18 जुलाई 2025 को लद्दाख के तीसरे उप-राज्यपाल के रूप में शपथ ली। करीब नौ महीने तक इस पद पर काम करने के बाद उन्होंने 5 मार्च 2026 को उप-राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया और अब उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।
वहीं, हिमाचल के मौजूदा राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। शिव प्रताप शुक्ल ने 18 फरवरी 2023 को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी और लगभग तीन साल तक इस पद पर सेवाएं दीं।











