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Sirmour: स्टोन क्रशर-खनन कारोबारियों से 2.82 करोड़ GST की रिकवरी, 142 मामलों में बड़ी कार्रवाई

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश के जीएसटी साउथ जोन परवाणू के प्रवर्तन विंग ने स्टोन क्रशर और खनन से जुड़े करदाताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 2 करोड़ 82 लाख 45 हजार 646 रुपए की जीएसटी रिकवरी की है. यह वसूली कुल 7 करोड़ 45 लाख 22 हजार 161 रुपए की निर्धारित मांग में से की गई है. विभाग के अनुसार यह कार्रवाई 142 स्टोन क्रशर और माइनिंग करदाताओं के खिलाफ की गई प्रवर्तन कार्रवाई के तहत की गई है.

स्टोन क्रशर-खनन कारोबारियों से GST की रिकवरी
इन मामलों में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत लगभग 137 करोड़ 41 लाख 32 हजार 298 रुपए के टर्नओवर की जांच की गई, जिसमें साउथ जोन के 180 करदाताओं को शामिल किया गया है. इन करदाताओं में जिला सोलन, शिमला, किन्नौर और सिरमौर के कारोबारी शामिल हैं. यह जानकारी साउथ जोन में खनन और खनिज से जुड़े जीएसटी मामलों की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में सामने आई, जिसकी अध्यक्षता संयुक्त आयुक्त जीडी ठाकुर ने की.

विभाग के अनुसार जिला सोलन के बीबीएन क्षेत्र के 38 स्टोन क्रशर से जुड़े मामलों में करीब 137 करोड़ 40 लाख 99 हजार 598 रुपए के आरसीएम टर्नओवर और 6 करोड़ 11 लाख 94 हजार 114 रुपए के टैक्स तत्व का मामला केंद्रीय जोन ऊना के संयुक्त आयुक्त को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया है. इन मामलों में खनन सामग्री पर रॉयल्टी के भुगतान पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होता है.

जीएसटी विभाग के अनुसार, खनिजों पर आरसीएम के तहत जीएसटी लगाने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट भी वैध ठहरा चुका है. इसके बाद अब स्टोन क्रशर और खनन कारोबारियों द्वारा खनन विभाग को दी जाने वाली रॉयल्टी पर 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करवाने पर आपत्ति नहीं जताई जा रही है. विभाग ने बताया कि शेष स्टोन क्रशर और खनन करदाताओं के मामलों में जीएसटी देनदारी विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन है और इन पर निर्णय व वसूली की कार्रवाई जारी है.

इस बीच सीमेंट्स कंपनी दाड़लाघाट से जुड़े एक मामले में खनन रॉयल्टी के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है. कंपनी द्वारा जीएसटी रिटर्न में दर्शाई गई आरसीएम टर्नओवर और खनन विभाग के रिकॉर्ड के बीच करीब 85 करोड़ रुपए का अंतर पाया गया है. यह अंतर आकलन वर्ष 2021-22 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) का बताया गया है. जीएसटी विभाग ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर इस अंतर की स्पष्टीकरण रिपोर्ट प्रस्तुत करे. इसके बाद एचपीएसजीएसटी अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

विभाग के अनुसार साउथ जोन का प्रवर्तन विंग कंपनी से जुड़े बड़े पैमाने के डाटा की जांच और मिलान कर रहा है, ताकि आरसीएम, एजीटी और सीजीसीआर देनदारी का अंतिम निर्धारण किया जा सके. जीएसटी विभाग ने यह भी निर्णय लिया है कि आकलन वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक के आरसीएम टर्नओवर पर देय 18 प्रतिशत जीएसटी की वसूली वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले सुनिश्चित की जाएगी. इसके लिए साउथ जोन के सभी प्रवर्तन और सर्किल अधिकारियों को सख्त और समयबद्ध निर्देश जारी किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई: संयुक्त आयुक्त
जीएसटी विंग साउथ जोन के संयुक्त आयुक्त जीडी ठाकुर ने बताया कि, “खनन से जुड़े मामलों में वर्ष 2020 से ही जीएसटी की मांग उठाई जा रही थी, लेकिन इस मुद्दे को खनन कारोबारियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी गई थी. अंततः पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया.दिसंबर 2025 में जीएसटी विंग परवाणू में संयुक्त आयुक्त का कार्यभार संभालने के बाद एडजुडिकेशन प्रोसीडिंग्स के बाद जीएसटी रिकवरी की कार्रवाई शुरू की गई है और पिछले एक वर्ष से इस दिशा में लगातार कार्रवाई की जा रही है.”

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