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हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर सर्दियों की वापसी का संकेत दे दिया है। रोहतांग की चोटियों से लेकर बारालाचा तक, आसमान से गिरते सफेद फाहे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आने वाले दिन पहाड़ों के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
11 से 16 मार्च: बारिश, बर्फ और ठिठुरन का नया दौर
हिमाचल में सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) राज्य के मौसम को पूरी तरह पलटने के लिए तैयार है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि कल से अगले पांच दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल बरसेंगे। जहाँ मैदानी इलाकों में बारिश की फुहारें तापमान गिराएंगी, वहीं ऊंचे शिखरों पर भारी बर्फबारी होने की प्रबल संभावना है।
येलो अलर्ट: विभाग ने गरज-चमक और ओलावृष्टि को लेकर कई जिलों में चेतावनी जारी की है। पिछले कुछ दिनों से 30 डिग्री सेल्सियस को छू रहा पारा अब अचानक नीचे गिरेगा, जिससे एक बार फिर स्वेटर और जैकेट अलमारियों से बाहर आ जाएंगे।
खेती और बागवानी पर संकट के बादल
यह बदलता मौसम केवल ठंड ही नहीं, बल्कि चिंता भी लेकर आया है। प्रशासन ने किसानों और बागवानों को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा है। तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि फलदार पेड़ों और तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुँचा सकती है।
बागवानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की गंभीरता को देखते हुए खेती से जुड़े जरूरी एहतियात पहले ही बरत लें।
हिमस्खलन (Avalanche) की चेतावनी: पर्यटकों के लिए ‘नो-गो ज़ोन’
बर्फबारी के बीच सबसे बड़ा खतरा हिमस्खलन का है। ऊंचे इलाकों में बर्फ की कच्ची परतें कभी भी खिसक सकती हैं, जिसे देखते हुए पुलिस प्रशासन सख्त हो गया है।
लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे संवेदनशील जिलों में लाउडस्पीकर के जरिए पर्यटकों को जोखिम भरे रास्तों पर न जाने की हिदायत दी जा रही है। अगर आप इन दिनों पहाड़ों की सैर का प्लान बना रहे हैं, तो फिलहाल संवेदनशील और ऊंचाई वाले इलाकों से दूर रहना ही समझदारी होगी।











