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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला जिला के चौपाल क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध रूप से सड़क निर्माण की शिकायत पर संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब तलब किया है। चौपाल डिवीजन के घने देवदार के जंगल में चूड़धार के लिए पांच किलोमीटर लंबी मोटर योग्य सड़क का अवैध रूप से निर्माण किया गया है। इस संबंध में प्राप्त शिकायत के आधार पर दर्ज जनहित याचिका पर कोर्ट ने संज्ञान लिया।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। यह सड़क चूड़धार स्थित शिरगुल महाराज के निवास स्थान की ओर जाती है।
देवदार के घने जंगल में सड़क निर्माण के दौरान कई पेड़ों के भी कटने का अंदेशा है, इस कारण हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार से तय समय में जवाब तलब किया है।
पवित्र सांस्कृतिक परिदृश्य में फैलेगी अशांति
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि चूड़धार पर्वत और उसके आसपास के जंगल न केवल पारिस्थितिक संपदा हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के लोगों द्वारा गहराई से आदर किया जाने वाला एक पवित्र सांस्कृतिक परिदृश्य भी है।
मोटर योग्य सड़क के निर्माण से क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन और व्यावसायिक शोषण होगा, जिससे शोर, प्रदूषण, अशांति, अतिक्रमण और अपशिष्ट उत्पादन होगा।
राजनीतिक संरक्षण का भी आरोप
आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के माध्यम से कुछ परियोजनाओं के तहत प्राप्त धन पारिस्थितिक संरक्षण और सतत वन प्रबंधन के लिए है, न कि उन गतिविधियों के लिए जो वनों और राज्य की पारिस्थितिक अखंडता को नुकसान पहुंचाती हैं।












