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न घर में अन्न, न स्कूल की फीस, मां छोड़कर चली गई, पिता की मौत से छिना दो बच्चों का आखिरी सहारा

Khabron wala

कहते हैं कि बच्चों के सिर पर पिता का हाथ किसी छांव से कम नहीं होता, लेकिन ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र की अलूहा पंचायत के गांव आघार में नियति ने दो मासूमों से उनका वो आखिरी सहारा भी छीन लिया. वार्ड नंबर-1 में रहने वाले इन दो बच्चों के सिर से पिता का साया क्या उठा और उनके जीवन में संघर्षों का अंधेरा छा गया है.

इन मासूमों की जिंदगी में त्रासदी 4 साल पहले ही शुरू हो गई थी, जब उनकी मां उन्हें अकेला छोड़कर दूसरी शादी कर चली गई थी, तब से पिता ही मजदूरी कर इन बच्चों के लिए मां और बाप दोनों का फर्ज निभा रहे थे. दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद जो चंद पैसे जुड़ते, उससे वह अपने बच्चों की पढ़ाई और भरण पोषण की लौ जलाए हुए थे, लेकिन अब पिता के अचानक निधन ने इन बच्चों को पूरी दुनिया में अकेला कर दिया है.

बच्चों की छूटी पढ़ाई

हालात इतने भावुक कर देने वाले हैं कि घर में न तो पर्याप्त राशन है और न ही पढ़ाई जारी रखने का कोई जरिया. स्कूल की फीस, किताबें और वर्दी की व्यवस्था न होने के कारण इन बच्चों की पढ़ाई छूट गई है. हालांकि, फिलहाल उनके ताया और कुछ दयालु पड़ोसी कभी कभार मदद कर देते हैं, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है.

जब इन अनाथ बच्चों की व्यथा सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची, तो समाज का मानवीय चेहरा भी सामने आया. कई समाजसेवियों ने घर पहुंचकर राशन, किताबें और आर्थिक सहायता प्रदान की. समाजसेवी केडी राणा ने कहा कि “हमारी व्यक्तिगत मदद इन बच्चों का भविष्य नहीं संवार सकती। इसके लिए सरकार को आगे आना होगा ताकि ये बच्चे बेफिक्र होकर अपना सुरक्षित जीवन जी सकें.”

‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ योजना की मांग

क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय विधायक संजय रतन से मुलाकात कर बच्चों की पूरी स्थिति उनके समक्ष रखी. विधायक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एसडीएम ज्वालामुखी को बच्चों की पेंशन और अन्य कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी.

वहीं, स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से पुरजोर मांग की है कि इन बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ योजना के दायरे में लाया जाए. इस योजना के तहत सरकार अनाथ बच्चों की 12वीं तक की पढ़ाई, हॉस्टल और उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठाती है. क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री की इस कल्याणकारी योजना का लाभ इन मासूमों को मिलता है, तो वे फिर से अपने सफल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकेंगे.

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