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हिमाचल पंचायत चुनाव से पहले बड़ा फैसला, HC ने DCs के 5% आरक्षण अधिकार पर लगाई रोक, जारी होगा नया रोस्टर

Khabron wala

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने जिला उपायुक्तों (DCs) को 5% सीटों पर आरक्षण लागू करने के अधिकार पर रोक लगा दी है. साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह मंगलवार शाम 5 बजे तक संशोधित (रिवाइज्ड) रोस्टर जारी करे. इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता है. न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि DCs को 5% आरक्षण लागू करने का अधिकार देना संविधान के अनुरूप नहीं है. अदालत ने कहा कि जिन सीटों पर DCs ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए आरक्षण लागू किया है, उन्हें रिवाइज कर नया रोस्टर जारी किया जाए.

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए मंगलवार शाम 5 बजे तक नया रोस्टर जारी करने को कहा है. इसके साथ ही सरकार को 10 हफ्तों के भीतर इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि याचिकाकर्ता को दो हफ्तों के भीतर कंप्लायंस फाइल करनी होगी. अगली सुनवाई 23 जून को तय की गई है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 243(D) से जुड़ा है, जो पंचायतों में आरक्षण से संबंधित है. कोर्ट ने माना कि DCs को इस तरह का अधिकार देना पंचायती राज अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप जरूरी था.

यह मामला पूर्व प्रधानों द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया. याचिकाकर्ता के वकील नंदलाल के अनुसार, 30 मार्च 2026 को राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर DCs को 5% सीटों पर आरक्षण तय करने का अधिकार दिया था. यह अधिकार भौगोलिक और विशेष परिस्थितियों के आधार पर दिया गया था, जिसे अब कोर्ट ने असंवैधानिक माना है.

31 मई से पहले करवाने हैं चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 31 मई से पहले चुनाव करवाने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार को जल्द से जल्द नया रोस्टर जारी करना होगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके. हाईकोर्ट के इस फैसले ने हिमाचल में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा बदलाव ला दिया है. अब सभी की नजर राज्य सरकार पर है कि वह तय समय में नया रोस्टर जारी कर पाती है या नहीं, क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक समीकरण दोनों प्रभावित होंगे.

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