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राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में कहा है कि नवनिर्वाचित नगर निकाय पार्षदों को सात दिन के भीतर शपथ दिलाई जाएगी. इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. अदालत में नवनिर्वाचित नगर पालिका पार्षदों को नियमानुसार सात दिन के भीतर शपथ न दिलाए जाने को लेकर मामला आया है. इस बारे में दायर याचिकाओं पर सुनवाई अब 1 जून को भी जारी रहेगी. वहीं, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को सूचित किया है कि नगर निकाय चुनावों में निर्वाचित पार्षदों को 7 जून तक शपथ दिला दी जाएगी.
हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ को बताया गया कि नगर पालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए बैठक आयोजित की जानी है. इसके लिए सात दिन का नोटिस देना आवश्यक है. अधिनियम और नियमों के अनुसार इसकी अधिकतम समय सीमा 30 दिन निर्धारित है.
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिलों के डीसी और एसडीएम सहित संबंधित अधिकारी वर्तमान में पंचायती राज चुनावों में व्यस्त हैं. पंचायत चुनावों के लिए मतदान 26, 28 और 30 मई 2026 को निर्धारित किया गया है. इसके परिणाम 31 मई तक घोषित किए जाने हैं. सरकार ने आश्वासन दिया कि नगर पालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों को 7 जून तक या उससे पहले शपथ दिला दी जाएगी.
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार नियमों में बदलाव कर रही है. इस से सुप्रीम कोर्ट के 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के आदेश का उल्लंघन हो रहा है. उन्होंने मांग उठाई कि याचिका लंबित रहने तक सरकार को चुनाव संबंधी मौजूदा नियमों में बदलाव करने से रोका जाए. कोर्ट ने इस मांग पर सोमवार को विचार करने की बात कही है.
प्रार्थियों ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव की शेष प्रक्रिया (जिसमें निर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाना शामिल है) का कार्यक्रम राज्य सरकार कैसे तय कर सकती है? यह कार्य राज्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है. इस पर सरकार ने कहा कि 23 मई की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य चुनाव आयोग की भूमिका समाप्त हो चुकी है और आगे की प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश नगर पालिका चुनाव नियम, 2015 के नियम 80 के तहत राज्य सरकार द्वारा पूरी की जानी है.
उल्लेखनीय है कि मंडी जिले की सुंदरनगर नगर परिषद से निर्वाचित पार्षद राकेश चंचल, विजय कुमार और लकेश कुमार सहित ठियोग से दिनेश शर्मा और सीमा ने कानून में निर्धारित समयावधि के भीतर शपथ न दिलाए जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में हिमाचल सरकार, राज्य चुनाव आयोग और शहरी विकास विभाग को पक्षकार बनाया गया है.









